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- डॉ. नीतीश प्रियदर्शी भूगर्भ शास्त्री, रांची
डॉ. नीतीश प्रियदर्शी भूगर्भ शास्त्री, रांची
‘जम्बू द्वीपे भारतखंडे आर्यावर्ते देशांतर्गते….अमुक...।’ इसपंक्ति में मनुष्य के रहने के स्थान तथा उसके बारे में जानकारी दी जाती है, जो पूजा करा रहा है। आखिर ये पंक्ति क्या दर्शाती है? क्या ये किसी स्थान के भूगोल के बारे बताता है? बार-बार जंबूद्वीप का उच्चारण होता है, आखिर यह जंबूद्वीप का रहस्य क्या है? वैसे एक और द्वीप का भी वर्णन होता है, जिसका नाम है शाकद्वीप। जंबूद्वीप और क्षार समुद्र के बाद शाकद्वीप है, जिसका विस्तार जंबूद्वीप से दोगुना है। उसके बाद उस से दोगुना बड़ा पुष्कर द्वीप है।
युरेशिया के देशों को मिलाकर बना है
विष्णु पुराण पर आधारित जम्बूद्वीप का मानचित्र
सप्तद्वीप के बारे में प्राचीन धारणा ऐसी थी कि सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं
जंबूद्वीप-आर्यावर्त में कौन-कौन देश आते हैं
हिमवान नामक पर्वत है
जंबूद्वीप के मध्य में सुवर्णमय सुमेरु पर्वत स्थित है
प्राचीन साहित्य में आर्यावर्त
भारतवर्ष और आर्यावर्त का रहस्य
क्या यह किसी स्थान के भूगोल के बारे बताता है
क्या है जंबूद्वीप
का भौगोलिक रहस्य
हिंदू पूजा में कई बार ऐसी पंक्तियों को सुनने का मौका मिलता है, जिसका अर्थ कहीं कहीं पृथ्वी के भूगोल के ज्ञान से जुड़ा होता है। जैसे एक उदाहरण है- कई बार मंत्रों के उच्चारण के पहले संकल्प के समय पंडितजी एक पंक्ति को बार बार बोलते हैं जैसे जंबूद्वीपे, आर्यावर्ते, भारतखंडे, (रांची या दूसरे संबंधित शहर) नगरे, फिर उसके बाद नक्षत्र और गोत्र का नाम आता है। जब भी मुंडन, विवाह आदि मंगल कार्यों में मंत्र पढ़े जाते हैं, तो उसमें संकल्प की शुरुआत में इसका जिक्र आता है।