नुकसान बच्चों का
नुकसान बच्चों का
मदरसोंमें पहले ही शिक्षकों की कमी है। जो हैं उन्हें भी वेतन नहीं मिल रहा है। इससे उनकी मानसिक परेशानी का असर शिक्षण पर पड़ रहा है। इससे नुकसान तो बच्चों का ही हो रहा है। शिक्षकों का कहना है कि उधार लेकर वेतन मिलने के इंतजार में गुजारा कर रहे हैं। अब तो राशन वाले भी उधार देना बंद कर चुके हैं। मानसिक परेशानी के बीच शिक्षा देने में कहीं कहीं कमी रह जा रही है।
प्रपोजल भेजा गया है
शिक्षकोंके वेतन भुगतान के लिए प्रपोजल भेजा जा चुका है। विभाग प्रयासरत है कि जल्द से जल्द सभी के वेतन का भुगतान हो जाए। केंद्र से फंड मिलते ही भुगतान हो जाएगा।
शिवचरणमरांडी, डीईओ,रांची
दो साल से हैं परेशान
राज्यके सभी एसपीक्यूएम शिक्षकों को दो साल से वेतन नहीं मिल रहा है। इसके कारण दिनोदिन आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। राज्य से प्रपोजल केंद्र को समय पर नहीं भेजे जाने से दो सालों से वेतन नहीं मिल पाया। शिक्षकों के सामने भूखों मरने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
आरिफहुसैन, महासचिव,झारखंड प्रदेश मदरसा आधुनिक शिक्षक संघ
उपयोगिता प्रमाण पत्र से लटका फंड
काफीप्रयास के बाद राज्य में एक साल देर से योजना लागू हुई। लेकिन जिलों के डीईओ द्वारा उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं भेजने के कारण शिक्षकों को चार वित्तीय वर्ष का फंड राज्य को नहीं मिला। शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने से पढ़ाई पर असर पड़ रहा है।
एसअली, अध्यक्ष,झारखंड छात्र संघ
डीबी स्टार >रांची
मदरसाआधुनिकीकरण शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में एक योजना एसपीक्यूएम (स्कीम प्रोग्राम क्वालिटी एजुकेशन इन मदरसा) वर्ष 2009 में देश के सभी राज्यों के मदरसों में साइंस, मैथ्स, अंग्रेजी की पढ़ाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। लेकिन इस योजना के तहत राजधानी सहित राज्य भर के मदरसों में बहाल शिक्षकों को मानदेय मिल पाने के कारण जीविकोपार्जन की परेशानी से दो-चार होना पड़ रहा है। पिछले दो साल से मानदेय नहीं मिलने के कारण इनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो चुकी है। यही स्थिति रही तो यह योजना दम तोड़ देगी। मदरसा के छात्र-छात्राएं समाज की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाएंगे।
164 मदरसों में बहाल शिक्षकों की आर्थिक स्थिति खराब
अनदेखी
शिक्षकों को दो साल से वेतन का इंतजार