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हार्डकोर माओवादी अनिल सिंह ने किया सरेंडर
हार्डकोरभाकपा माओवादी उग्रवादी 20 वर्षीय अनिल सिंह ने रविवार को रनिया में डीजीपी राजीव कुमार के समक्ष सरेंडर कर दिया। उसने डीजीपी को अपनी कार्बाइन राइफल भी सौंप दी। अनिल पोड़ाहाट सबजोनल एरिया कमिटी के सचिव के रूप में काम कर रहा था। उसके खिलाफ नरिया, सोनुआ टेबो थाने में उग्रवादी घटनाओं से जुड़े पांच मामले दर्ज हैं। वह पिछले पांच साल से सक्रिय था। पहले वह पीएलएफआई के लिए काम करता था। डीजीपी ने उसे सरकार की नीति के तहत तत्काल 50 हजार रुपए दिए। मौके पर एडीजी अनिल पाल्टा, आईजी एमएस भाटिया खूंटी एसपी अनीश गुप्ता भी मौजूद थे।
मुख्यधारा में लौटें उग्रवादी
इसअवसर पर डीजीपी राजीव कुमार ने कहा कि उग्रवादियों का भविष्य ठीक नहीं है। इसलिए वे अपनी भाग-दौड़ की जिंदगी छोड़ें और सरकार की सरेंडर नीति का लाभ लेते हुए आत्मसमर्पण करें। नहीं तो जानें कब पुलिस की गोली के शिकार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस का अभियान लगातार चल रहा है। दबिश बढ़ती जा रही है। पिछले दो साल में नक्सली घटनाओं में भी काफी कमी आई है। नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल हो जाना चाहिए। उनके लिए आकर्षक नीति तैयार की गई है।
सरेंडर करने के बाद अनिल सिंह ने कहा कि उसने कुंदन पाहन समेत कई नक्सली सरगनाओं के साथ काम किया है। लेकिन अब माओवादी संगठन में सिर्फ शोषण हो रहा है। नीचे के सदस्यों के साथ बड़े पद वालों का व्यवहार काफी बुरा है। लोग संगठन को छोड़ रहे हैं। पुलिस के अभियान से जान को भी खतरा था। इसलिए उसने मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया। उसने बताया कि मैट्रिक पास करने के बाद 2010 में रांची के जेएन कॉलेज में एडमिशन लिया था। छह माह बाद पीएलएफआई के प्रकाश ने उसका अपहरण कर संगठन में शामिल कर लिया था।
हार्डकोर उग्रवादी अनिल सिंह डीजीपी को अपना कार्बाइन सौंपते हुए।