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छात्र-छात्राओं ने लगाई पंचायत, सुनाया फैसला
चारोंओर रंग-बिरंगी झंडियां। पेड़ से लटकती कटी पतंग। नीम और पीपल के पेड़ों की छाया में बैठे सरपंच और मुखिया सामने गांव के स्त्री-पुरुषों की भीड़। हर कोई अपना दुखड़ा सुनाता हुआ। वहीं पक्ष-विपक्ष की बातें गौर से सुनकर पंच का निर्णय। जिसे सहर्ष मानते ग्रामीण। प्रेमचंद की मशहूर कहानी पंच परमेश्वर का दृश्य रविवार को बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मेसरा में साकार दिखा। मौका था पंचायती राज कार्यक्रम के आयोजन का। इसके साथ ही तीन दिवसीय रोस्ट्रा 2015 का समापन हो गया।
अंतिम दिन पंचायती राज कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने ग्रामीण पंचायत, उसके कार्य और उससे मिलने वाले फायदे के बारे में जाना। रोस्ट्रा में दिखाया गया कि कैसे पंचायती व्यवस्था कार्य करती है। वहीं ग्रामीण परिवेश में हुई पंचायत की भूमिका से सभी रूबरू हुए।
बिखरी संस्कृति की छटा
पहलेदिन जहां कवियों ने महफिल जमाई, वहीं दूसरे दिन युवा संसद को छात्र-छात्राओं ने खूब सराहा। इसके अलावा गीत, नृत्य, कला और साहित्य से स्टूडेंट्स भावविभोर होते रहे। कार्यक्रमों में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, सेंट जेवियर्स कॉलेज रांची, एक्सआईएसएस, मारवाड़ी कॉलेज, गोस्सनर कॉलेज और बीआईटी के स्टूडेंट्स ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
एनएलयू बनी विजेता
कार्यक्रममें कुल 25 टीमों ने हिस्सा लिया। अशंक कुमार, अभिषेक चौधरी, अभिषेक गौरव, अनुराग नंद कोल्यार और श्रुति श्रेया ने पंचों की भूमिका निभाई। पक्ष एवं विपक्ष के लोगों ने नागपुरी, भोजपुरी, मगही और मारवाड़ी में अपनी बातें रखीं। एनएलयू की टीम लोगरिथमिक को विजेता घोषित किया गया।
रोस्ट्रा के अंतिम दिन पंचायती राज कार्यक्रम में भाग लेते स्टूडेंट्स।