दिल्लीकी जनता ने य
गांव की बहू : सरकारी टीचर
झारखंडके एक गांव में/नई-नवेली बहू/पारा टीचर बन गई है/सरकारी नौकरी लग गई है/धीरे-धीरे सरकारी दांव-पेंच भी वह सीख गई है/खाना खाने भी जाती है, तो/श्याम-पट्ट पर लिख देती है/शौचालय जा रही हूं/ताकि कोई सरकारी नुमाइंदा/निरीक्षण में अनुपस्थित जानकर हाजिरी काट दे/अभी उसे खिचड़ी भी चखना है/वोटर कार्ड के लिए आवेदन भी लेने हैं/वह आदमी से जानवर तक की गिनती जानती है/अफसोस, उसे पढ़ाने का वक्त नहीं मिलता।
गुलामगौस ‘आसवी’, मदनाडीह, धनबाद से...
दिल्लीकी जनता ने यह साबित कर दिया कि मगरूर नेताओं अथवा राजनीतिक दलों का गरूर वे ही तोड़ सकते हैं। आखिर क्यों हो, दिल्ली में देश के सभी राज्यों के लोग रहते हंै और वे अपेक्षाकृत अधिक बुद्धिजीवी हैं। अरविंद केजरीवाल की इस प्रचंड जीत से राजनीति के मायने ही बदल गए हंै। अब जनता नेताओं के झांसे में नहीं आने वाली। अब जनता आठ महीने भी बर्दाश्त नहीं करने वाली, उन्हें 20-20 मैच की तरह तत्काल रिजल्ट चाहिए अथवा यह नजर आना चाहिए कि आप कुछ कर भी रहे हंै या नहीं! लगता है प्रधानमंत्री को यह बात समझ में गई होगी। खुशी की बात यह है कि भारत का लोकतंत्र अब परिपक्व हो रहा है।
डी.कृष्णमोहन, राजधनवार से...
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