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30सितंबर (मंगलवार) क

7 वर्ष पहले
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जिस डोली में माता चिंतामणी को जगन्नाथपुर मौजा से बाहर आनी मौजा ले जाया जाता है, वह डोली शहीद विश्वनाथ परिवार के बहुओं द्वारा उतारी गई साड़ियों से सजाई जाती है। साथ ही मां चिंतामणी की शोभायात्रा के लिए बांस से डोली बनती है। उसे ठाकुर परिवार के बहुओं द्वारा अच्छी तरह धोकर सजाया जाता है। इस बारे में अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के उत्तराधिकारी ठाकुर नवीन नाथ शाहदेव ने बताया की उस समय रानी वाणेश्वरी कुंवर जो कपड़े जुटा पाईं, उसी को डोली में लगा दिया, जो परंपरा बन गई। आज भी इस परंपरा को हमलोगों के द
30सितंबर (मंगलवार) को षष्ठी है। उसी दिन बेलबरण पूजा के साथ जगन्नाथपुर बड़कागढ़ (जगन्नाथपुर) में ऐतिहासिक दुर्गापूजा का शुभारंभ होगा। बुधवार को महासप्तमी के दिन बड़कागढ़ से माता चिंतामणी की शोभायात्रा आनी मौजा स्थित देवी घर तक के लिए निकाली जाएगी। इससे पहले माता चिंतामणी की भव्य पूजा अर्चना बड़कागढ़ में होगी। यह ऐतिहासिक पूजा 1691 से आयोजित हो रही है। बड़कागढ़ के राजा ठाकुर एनीनाथ शाहदेव के समय यह पूजा सिसई के नवर| गढ़ में होती थी। जिसे राजसी पूजा या सामूहिक पूजा के नाम से जाना जाता था। बड़कागढ़ में इस पूजा का शुभारंभ 1880 में तत्कालीन राजा ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव की धर्म प|ी वाणेश्वरी कुंवर द्वारा शुरू की गई। तभी से बड़कागढ़ में स्थापित माता चिंतामणी की पूजा के साथ यहां दशहरा पूजा का शुभारंभ होता है। वैसे तो माता चिंतामणी की पूजा अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के परिजनों द्वारा जगन्नाथपुर में सालों भर की जाती है। चूंकि जगन्नाथपुर स्वामी जगन्नाथ की पूजा स्थली है इसलिए बली निषेध है। इस कारण दुर्गा पूजा के समय बली की प्रथा के लिए जगन्नाथपुर मौजा से बाहर आनी मौजा में माता चिंतामणी को मंदिर (चांदी का) सहित देवी घर में स्थापित किया जाता है। जहां बाबा चैतनाथ द्वारा स्वलिखित मंत्र द्वारा पूजा की जाती है जो कि सिद्धि द्वारा पाया गया है। यहां की पूजा गुप्त दुर्लभ है।

पालकी हो चुकी है तैयार

पूजाको लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मां जिस पालकी में आएंगी और जाएंगी, उसे तैयार कर लिया गया है। प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी मुस्लिम परिवार द्वारा पूजा को सफल बनाने में सहयोग किया जाएगा। लालप्रवीर नाथ शाहदेव, अमरशहीद के वंशज

पूजा में मुस्लिम भी होते हैं शामिल

1880से ही निकाले जाने वाली शोभा यात्रा के मार्ग की सफाई जगन्नाथपुर में रहने वाले मुस्लिम परिवार के सदस्यों द्वारा की जाती है। महासप्तमी के दिन सखावत अली उनके परिजन मार्ग की सफाई करते हैं। पूजा में बढ़चढ़ कर शरीक होते हैं। मुस्लिम परिवार द्वारा परंपरा का निर्वाह लगातार किया जा रहा है।

बहुओं की साड़ी से सजती है डोली

बड़कागढ़ की ऐतिहासिक पूजा में नवमी के दिन निशा पूजा होती है, जिसमें भेड़ की बलि देने की परंपरा है। भेड़ तथा पूजन सामग्री मुस्लिम परिवार द्वारा हर साल मुहैया कराई जाती है। साथ ही पूजा में भी शामिल होक