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नाली बनने से पहले हो रही जाम गुणवत्ता देखनेवाला भी कोई नहीं
राजधानीसुंदर दिखे, आम लोगों को परेशानी हो उनके घर और सड़क का पानी नाली में जाए इसके लिए करोड़ों रुपए खर्च कर शहर की कई प्रमुख सड़कों के किनारे कंक्रीट ड्रेन का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन शहर में कई जगहों पर ये नालियां बेतरतीब ढंग से बनाई जा रही हैं। ड्रेन की चौड़ाई कहीं ज्यादा है तो कही कम। लेवल तक एक समान नहीं है। नाली के ऊपर स्लैब रखने की जगह ढलाई कर दी जा रही है। जिससे सफाई में दिक्कत होगी। स्थिति यह है कि शहर में नाली बनने से पहले ही जाम हो जा रही है। इसकी गुणवत्ता भी देखनेवाला कोई नहीं है। कई जगहों पर तो नालियों के निकास द्वार का भी पता नहीं चलता।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
^नालीनिर्माण से पहले सभी विभागों की बैठक होनी चाहिए। एक डिजाइन तैयार होना चाहिए कि गंदा बारिश का पानी कहां पर गिरेगा। नाली की ऊंचाई, गहराई कहां पर कितनी होगी। जोन वाइज काम हो, ताकि ड्रेनेज समस्या दूर हो सके। राजीवचड्डा, आर्किटेक्ट
गड़बड़ी है तो होगी जांच
^शहरके सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी विभाग की है। इसमें सिवरेज-ड्रेनेज सिस्टम भी शामिल है। कई जगहों पर नालियों का निर्माण कराया जा रहा है। अगर किसी तरह की गड़बड़ी की जा रही है तो इसकी जांच कराई जाएगी। सीपीसिंह, नगर विकास मंत्री
डंगराटोली रोडके किनारे
राजभवन केसामने
यहां बेतरतीब ढंग से कंक्रीट की नाली का निर्माण कराया गया है। जो बनी है, वो बीच से गंदगी से जाम हो गई है। लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं है।
नाली का मुहाना कहां है और निकास कहां होगा, पता ही नहीं है। लेकिन राजभवन के समक्ष लाखों रुपए खर्च कर कंक्रीट की नाली का निर्माण करा दिया गया।
~ 22 करोड़ 78 लाख
बडग़ाई बस्ती रोड, रिम्स बिजली चौक से चेशायर होम रोड, बहू बाजार से नामकुम थाना रोड, उद्धव बाबू लेन से कामिल बुल्के रोड।
~ 19 करोड़ 42 लाख
शहीद चौक से हरमू रोड, सहजानंद से कडरू पथ, हरमू चौक से भारत माता चौक, कडरू से हिंदपीढ़ी तक, एलपीएन शाहदेव चौक से रातू रोड मंदिर तक।
~ 18 करोड़़ 25 लाख
मेन रोड नाली, फुटपाथ, ओवरब्रिज पुर्न स्थापना, काली मंदिर चर्च रोड से बहू बाजार पथ
~ 17 करोड़ 48 लाख
टैगोर हिल से रिम्स तक, मेन रोड उर्दू लाइब्रेरी से किशोर गंज चौक, पहाड़ी मंदिर से हरमू पथ, शहीद चौक से राजभवन पथ।
शहर में सबसे पहले ड्रेनेज बनना है, फिर सड़क का निर्माण होना है। 40 फीसदी राशि नाली पर और 60 फीसदी सड़क पर खर्च हो रही है।
बेस्ट मॉडल है गुजरात
गुजरातके सूरत नगर निगम ने 1425 किमी की सिवर लाइन बिछाई है। सेप्टिक टैंक वेस्ट को सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाने के लिए 34 सिवर पंपिंग स्टेशन बनाए गए हैं। वहीं नालियों से निकलने वाले गंदे पानी के ट्रीटमेंट के लिए 9 एसटीपी बना हुआ है। बारिश के समय में भी सूरत की सड़कों पर जलजमाव नहीं के बराबर होता है।
इसलिए है परेशानी
राजधानीमें पथ निर्माण विभाग, आरआरडीए और नगर निगम की ओर से ड्रेनेज का निर्माण होता है। इसके अलावा सांसद और विधायक का फंड भी इसपर खर्च होता है। विभिन्न एजेंसियों की ओर से नाली पर करोड़ों रुपया खर्च तो कर दिया जाता है, लेकिन तालमेल नहीं होने से आधी-अधूरी नाली बना कर छोड़ दी जाती है।
थड़पखना रोड
दोनों ओर नाले का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन ही गुणवत्ता का ध्यान रखा गया है और ही नाले के लेबल का। कई जगह बनने से पहले ही नाला जाम हो गया है।