बच्चों के मार्गदर्शक बुजुर्ग : पांडेय
बुजुर्गबच्चों के सही मार्ग दर्शक हैं। परिवार में बुजुर्गों का स्थान और महत्व सबसे ऊपर रहना चाहिए है। यह बातें अपर मुख्य सचिव एनएन पांडेय ने कहीं। वे गुरुवार को जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली में आयोजित ग्रैंड पैरेंट्स डे समारोह में बोल रहे थे। रामवृक्ष बेनीपुरी लिखित पुस्तक गेहूं और गुलाब का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि घर में दादा-दादी और नाना-नानी बच्चों के दोस्त के साथ-साथ उनके मार्गदर्शक भी होते हैं। हम अपने बुजुर्गों के तजुर्बे से सीख लेकर और उनके आशीर्वाद से ही आगे बढ़ सकते हैं। लेकिन आज हम पाश्चात्य सभ्यता का अंधानुकरण कर अपने संस्कार और बुजुर्गों को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए स्कूलों में इस तरह के कार्यक्रमों को बहुत ही जरूरी बताया। मौके पर स्कूल के छात्र-छात्राओं ने बुजुर्गों का स्वागत गुलाब फूल देकर किया। कार्यक्रम में एपी सिंह, पीके कर, एस के घोष, संजय कुमार, सुष्मिता मिश्र सहित अन्य शिक्षक और 200 से ज्यादा बुजुर्ग उपस्थित थे।
प्राचार्य एके सिंह ने बुजुर्गों का स्वागत करते हुए बच्चों से कहा कि वे प्रतिदिन सुबह जगने के साथ ही अपने बुजुर्गों माता-पिता के चरण स्पर्श करें। उन्होंने कई दोहों के माध्यम से बुजुर्गों के महत्व के बारे में बताया।
ओल्ड एज होम में लिया आशीर्वाद
कार्यक्रमके बाद स्कूल के शिक्षक और 50 छात्रा-छात्राएं बरियातू स्थित ओल्ड एज होम गए। वहां उन्होंने सभी बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया। छात्रों ने वहां भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
बुजुर्गों से मिलते हैं तीन तरह के संस्कार : माधवानंद
विशिष्टअतिथि चिन्मय मिशन के स्वामी माधवानंद ने कहा कि बच्चों को अपने बुजुर्गों से तीन तरह के संस्कार मिलते हैं। दादा-दादी, नाना-नानी बच्चों को व्यक्तिगत संस्कार, पारिवारिक संस्कार और सामाजिक संस्कार से परिपूर्ण बनाते हैं। वे बच्चों के सही मायने में फेसिलिटेटर हैं।
मौके पर बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया। इसमें डॉ. रमण, डॉ. अंचल और डॉ. रविशंकर द्विवेदी ने क्रमश : दांत, हड्डी और चर्मरोग की जांच की।
जेवीएम श्यामली में आयोजित ग्रैंड पैरेंट्स डे कार्यक्रम में शामिल बच्चों के अभिभावक।
नृत्य प्रस्तुत करती प्रतिभागी छात्रा।