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आजसू ने राजभवन, एबीवीपी ने सीएम हाउस घेरा

7 वर्ष पहले
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रांची. आजसू पार्टी ने बुधवार को राजभवन का घेराव किया, वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सीएम आवास का घेराव किया। इससे पूरे दिन शहर में जाम जैसी स्थिति रही। प्रदर्शन कर रहे आजसू और एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने पानी की बौछार की और आंसू गैस के गोले छोड़े। जब प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया तो पुलिस ने लाठियां भांजी।
आपकी ताकत हमें डराती क्यों है?
राजधानी में बुधवार को आजसू और एबीवीपी ने मार्च निकाला। दोनों संगठनों ने अपनी ताकत का अहसास करवाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। खुद को अनुशासित कहने वाले आजसू-विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने जिस अनुशासनहीनता का नजारा पेश किया, वह देखने लायक था। मोटे-मोटे बल्लों की बैरिकेडिंग क्षण भर में ताश के पत्ते की तरह भहरा गई। पुलिस की लाठी, पानी की बौछार और आंसू गैस के गोले भी इनको संभाल नहीं पा रहे थे। इस शक्ति प्रदर्शन से शहर का आधा से ज्यादा इलाका पूरी तरह से डिस्टर्ब। हर तरफ जाम। गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें। जाम में फंसे बेबस राजधानीवासी। कहीं स्कूल बसों से निहारते भ्ूख से विकल नौनिहाल, तो कहीं एंबुलेंस में अंतिम सासें गिन रहे मरीज। सालाना जलसे की तरह यदि एक दिन की यह बात होेती, तो फिर भी ठीक था। लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव के पहले अब दलों के शक्ति प्रदर्शन का यह नजारा अक्सर देखने को मिलेगा। नेताओं की इस ताकत का अहसास हम सबको है। हम मानते हैं कि आप माननीय ताकतवर हैं। लेकिन जनता को परेशानी में डालकर अपनी इस ताकत के बार-बार प्रदर्शन से आप आखिर क्या साबित करना चाहते हैं ? क्या इसी परेशानी के लिए जनता आपको वोट देकर सदन तक पहुंचाती है ? आपके राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए यह तमाशा कहां तक जायज है ? झारखंड में हाईकोर्ट की भी कोई नहीं सुनता। सालों पहले झारखंड हाईकोर्ट मेन रोड समेत प्रमुख मार्गों पर ऐसे धरने-प्रदर्शन बैन कर चुका है। लेकिन इस आदेश की धज्जियां उड़ती रहती हैं, प्रशासन धृतराष्ट की तरह आखें मूंदे रहता है। लेकिन माननीय, अब जनता जाग रही है। परेशान करने वाले ये कृत्य अब ज्यादा दिन नहीं चलेंगे। समय आ गया है कि दिल्ली, मुंबई, जयपुर की तरह रांची में भी ऐसी एक जगह चुनी जाए, जहां राजनीतिक दल अपना शक्ति प्रदर्शन तो करें, पर जनता परेशान न हो। प्रशासन, नेता और जनता यदि चाह लें, तो क्या यह मुमकिन नहीं होगा?
फोटो : रमीज।