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छात्र अविनाश तिवारी हत्याकांड: विधायक सावना हत्या के दोषी

8 वर्ष पहले
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रांची. कांग्रेस के विधायक सावना लकड़ा को छात्र अविनाश तिवारी हत्या मामले में सोमवार को प्रधान न्यायायुक्त एसएच काजमी की अदालत ने दोषी करार दिया। मामले में उनके तीन सहयोगी जनक महतो, गोपी कच्छप और दिनेश लकड़ा को भी दोषी माना है। चारों अभियुक्तों को अदालत ने हत्या व अन्य धाराओं के तहत दोषी ठहराया है।
जनक महतो को आर्म्स एक्ट में भी दोषी पाया है। चारों आरोपी जेल में हैं। इनकी सजा पर सुनवाई 15 मई को होगी।
गढ़वा जिला के रंका का अविनाश तिवारी 24 अप्रैल 2011 को घर से रांची के लिए निकला था। 26 अप्रैल की रात 8:40 बजे उसने अपने साथी राजकमल पांडे को मोबाइल पर बताया कि सावना के अंगरक्षकों ने उसे पकड़ कर बरगांवा स्थित फार्म हाउस में रखा है। इसके बाद अविनाश के पिता संजय तिवारी ने 26 अप्रैल को सावना और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई
सुनियोजित षड्यंत्र के तहत हुई हत्या
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल 34 गवाहों का बयान दर्ज कराया गया। लगातार एक महीने तक दोनों पक्षों की ओर से बहस हुई। इसके बाद अदालत ने उक्तहत्या की घटना को सही पाया और परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर सभी आरोपियों को दोषी पाया। फैसले में उल्लेख किया गया है कि हत्या करने के लिए सुनियोजित षडयंत्र रचा गया। फिर उसका अपहरण कर हत्या की घटना को अंजाम दिया गया। अदालत ने सभी आरोपियों को साक्ष्य छुपाने के मामले में भी दोषी पाया।
हत्या की वजह बना प्रेम-प्रसंग
मामले की जांच और अदालत में सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि सावना की बेटी उषा लकड़ा और अविनाश के बीच प्रेम संबंध था। सावना को पता था कि अविनाश घंटों उषा लकड़ा से मोबाइल पर बात करता था। यदाकदा दोनों बाइक से साथ आते-जाते भी थे। कई बार दोनों को रेस्टोरेंट में भी साथ देखा गया था। इसके बाद अविनाश को एक षड्यंत्र के तहत फोन कर गढ़वा से रांची बुलाया गया। फिर उसका अपहरण कर हत्या की साजिश रची गई थी।
सरकारी पिस्टल से हत्या
मामले के जांच अधिकारी ने दो महीने के अंदर अदालत में चारों आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटा कर चार्जशीट दाखिल किया। इससे पूर्व चार गवाहों का सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज करवाया। इसमें सावना के निजी गार्ड ने बताया कि उसने ही बड़गांवा स्थित फार्म हाउस से ले जाकर नदी के एक टीले पर अविनाश की कनपट्टी में सटा कर गोली मारी थी।
उसने ऐसा सावना लकड़ा के निर्देश पर ही किया था। अदालत में सार्जेट मेजर ने खुलासा किया कि इस्तेमाल किया गया पिस्टल और गोली सरकारी थी। यह उसके अंगरक्षक को मुहैया कराई गई थी। एक अन्य गवाह ने बताया कि हत्या के बाद सरकारी कार के साथ एक निजी वाहन से शव को कर्रा की ओर ले जाकर नदी किनारे पुल के नीचे झाड़ी में फेंक दिया गया।