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डाउनलोड करेंरांची. समाज कल्याण विभाग ने बच्चों के पोषाहार के लिए निकाले गए टेंडर में बैक डेटिंग कर एक शर्त (क्लासिफिकेशन) जोड़ दिया है। यह संशोधन पत्र माइक्रो न्यूट्रेंट की मात्रा एवं पोषाहार गुणवत्ता निर्धारण संबंधी है। पहले पोषाहार की गुणवत्ता तय नहीं की थी। इस पर सवाल उठने के बाद विभाग ने 22 जनवरी की तिथि में निर्गत यह संशोधन शर्त संबंधित वेबसाइट पर 27 जनवरी की सुबह साढ़े नौ बजे जारी किया है। इससे अब तीन दिन में ही टेंडर डालने वाले को अपने प्रोडक्ट का दिल्ली स्थित खाद्य संरक्षण मानक प्राधिकार में प्रोडक्ट जमा कर प्राप्ति रसीद के साथ टेंडर भरना होगा।
इससे पहले नेशनल एक्रेडेशन बोर्ड फॉर लैब के निबंधित प्रयोगशाला से प्रोडक्ट की जांच कराना अनिवार्य है। इसके बगैर टेंडर में कोई क्वालिफाई नहीं कर सकेगा। 30 जनवरी को टेंडर डालने की अंतिम तिथि है।
ऐसा करने के पीछे क्या हो सकती है मंशा
कहा जा रहा है कि ऐसा कुछ खास कंपनियों के लिए किया गया है। पहले उसे इसकी जानकारी दे दी गई है। दूसरे दावेदार प्रतिस्पर्धा में नहीं रहे इसलिए तीन कंपनियों को जमीन आवंटन के बाद यह दूसरी साजिश हुई है। जिन कंपनियों को सरकार से जमीन नहीं मिली है, वह अपने स्तर से यदि किसी के साथ लीज कर जमीन लेने के कागजात के साथ टेंडर भरता है, तो प्रतिस्पद्र्धा बढ़ जाएगी। टेंडर में प्रतिस्पद्र्धा नहीं बढ़े, इसके लिए ऐसा किया गया है। सूत्रों का कहना है कि मनमर्जी करने वाली कंपनियों को इस नए क्लासिफिकेशन की जानकारी 22 जनवरी को ही दे दी गई है। माना जा रहा कि कुछ खास कंपनियों को क्वालिफाई कराने के लिए सीवीसी गाइडलाइन के विपरीत टेंडर निकाला गया है।
गाइडलाइन के विपरीत हैं टेंडर में कई प्रावधान
टेंडर में विभाग द्वारा बीडर के लिए दो वर्ष का औसत टर्न ओवर 38 करोड़ होने की शर्त रखी गई है। लेकिन यह टर्न ओवर किस चीज का होना चाहिए, यह स्पष्ट नहीं है। प्री-बिड मीटिंग में इस पर सवाल उठा था, फिर भी इसे स्पष्ट नहीं किया गया है।
चयन प्रक्रिया का उद्देश्य सक्षम एवं अच्छी फर्मों, जिनका पुराना अनुभव सही हो, संबंधित फर्म की उसी क्षेत्र में पुराने अनुभव एवं वित्तीय सुदृढ़ता को पूर्व योग्यता शर्त निर्धारित करने में ध्यान रखा जाए।
जिस वस्तु के लिए टेंडर मांगा जा रहा है, उसी वस्तु के पुराने अनुभव व उसी क्षेत्र में संबंधित फर्म की वित्तीय सुदृढ़ता को चयन की पूर्व शर्त में रखना है। लेकिन इसका खुलासा टेंडर में नहीं किया गया है। कई चहेती कंपनियों के पास पूरक पोषाहार आपूर्ति के क्षेत्र में पिछले दो वित्तीय वर्षों में यह न्यूनतम टर्न ओवर नहीं है।
न्यूनतम योग्यता नहीं रहने पर सबसीडियरी कंपनी के अनुभव को मान लेने का प्रावधान टेंडर पेपर में है। इस पर आपत्ति है। लेकिन इसे संशोधित नहीं किया गया है।
निदेशक ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया
इस संबंध में समाज कल्याण निदेशक पूजा सिंघल पुरवार से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। मैसेज कर बताया कि एसएमएस करें। भास्कर ने उन्हें एसएमएस किया और पूछा कि यह शिकायत कितनी सही है। इस बारे में कुछ कहना है, तो बता दें। लेकिन देर रात तक उन्होंने इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी।
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