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बेथल मिशन : अनाथ बच्चों के लिए मिलने वाली राशि से करोड़पति बन गए संस्थापक

7 वर्ष पहले
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(संस्था की जमीन पर संस्था द्वारा मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स बनाया गया है।)
रांची. बेथल मिशन की स्थापना वर्ष 1994 में एक स्वयंसेवी संस्था के रूप में हुई थी। संस्था का रजिस्ट्रेशन दिल्ली में कराया गया। अनाथ, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा व विकास कार्य के उद्देश्य के साथ संयुक्त बिहार के समय संस्था ने रांची के बोड़ेया में अपना काम शुरू किया। तब से लेकर आज तक कितने बच्चे शिक्षित हुए, कितने अनाथ बच्चों को सहारा मिला, विकास के नाम पर संस्था द्वारा किस क्षेत्र में क्या काम किया गया, इन सवालों का सटीक जवाब संस्था के संस्थापक जेम्स पुन्नूस के पास भी नहीं है। मगर संस्था के शुरू होने के बाद से लेकर अबतक जेम्स पुन्नूस ने अपने नाम से बोड़ेया, मुरहू व चमराटोली में करोड़ों की अचल संपत्ति खरीदी। अपने नाम से खरीदी गई संपत्ति को संस्थान का बताते हुए हर माह लाखों का एड लेते रहे।
70 लाख में बेची संपत्ति: जेम्स पुन्नूस रांची ही नहीं, केरल में भी संस्था खोले हुए थे। जिसका संचालन करीब तीन साल तक हुआ। उसके बाद वहां की सारी संपत्ति बेच दी। केरल में जमीन लेकर संस्था खोलने व निर्माण आदि पर करीब 25 लाख रुपए खर्च हुए थे। संस्था के पूर्व कर्मी ने बताया कि जेम्स पुन्नूस ने केरल की सारी संपत्ति 70 लाख रुपए में बेची, मगर डीड पेपर में मात्र 39 लाख रुपए ही दर्शाए। 51 लाख रुपए अपने पास रख लिए। जिसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।
बोड़ेया में करोड़ों की जमीन: संस्था के नाम से बोड़ेया में मात्र 25 डिसमिल जमीन है। इस जमीन पर संस्था द्वारा मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स बनाया गया है। कॉम्प्लेक्स के पीछे करीब एक एकड़ व 15 डिसमिल जमीन जेम्स पुन्नूस ने अपने नाम से खरीदी है। जेम्स की व्यक्तिगत जमीन पर ही बच्चियों का हॉस्टल, क्लास रूम, किचन व ब्वॉयज हॉस्टल बना हुआ है। बच्चों के नाम से संस्थान को मिलने वाली राशि से संस्थान के बजाए संस्थापक ने खुद के नाम से जमीन की खरीदारी कर ली।
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