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बाहर से आए लोगों को टिकट देने में भाजपा अव्वल, 16 को बनाया है अपना उम्मीदवार

7 वर्ष पहले
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रांची. राजनीति में पार्टी का झंडा ढोने वाले का टिकट पर पहला नैतिक अधिकार बनता है। लेकिन अब ये कहने भर की बात रह गई है। समय, काल व परिस्थिति के अनुसार पार्टियों की नीति, सिद्धांत व व्यवहार भी बदल चुका है। अबकी विधानसभा चुनाव में पार्टी का बैनर-पोस्टर लगानेवाले, कार्यक्रमों में टेंट-तंबू गाड़ने वाले, ताकते रह गए। टिकट की चाह में नेता अंतिम समय में पार्टी में शामिल हुए या हो रहे हैं और दल बदलते ही टिकट लेकर चल दे रहे हैं। राजनीतिक दलों की रायशुमारी, स्क्रीनिंग, सर्वेक्षण सभी ताक पर हैं।
63 में 9 को भाजपा से टिकट
इस बार विस चुनाव के लिए बाहरियों को टिकट देने में भाजपा सबसे आगे रही। अब तक घोषित 63 उम्मीदवारों में भाजपा ने सबसे अधिक नौ लोगों को टिकट दिया। वहीं झामुमो की अब तक घोषित 48 प्रत्याशियों की लिस्ट में दूसरे दल से आनेवाले तीन नेताओं को टिकट मिला है। झाविमो ने भी अब तक घोषित 36 सीटों में दूसरे दलों से आए चार नेताओं को टिकट दिया है। कांग्रेस इसमें सबसे पीछे है। उसने अब तक घोषित 28 सीटों में किसी दूसरे दल से आनेवाले नेता को टिकट नहीं दिया है। कुल मिलाकर अब तक बड़े दलों ने 16 बाहरियों को अपना उम्मीदवार बनाया है।
अनंत प्रताप देव : एयरपोर्ट पर खुद को कांग्रेस का निष्ठावान कार्यकर्ता बताया। दो घंटे बाद पांच किमी दूर बीजेपी कार्यालय पहुंचे और भवनाथपुर से भाजपा का टिकट ले लिया।
जेबी तुबिद : राज्य के वरिष्ठ नौकरशाह दिन के 11 बजे तक सरकारी सेवा में रहे। भाजपा कार्यालय पहुंचे और भाजपा के हो गए। अगले दिन चाईबासा से प्रत्याशी बन गए।
लालचंद महतो : कभी जदयू में रहे लालचंद महतो ने हाल में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी कार्यालय में भोज-भात की। डुमरी से भाजपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है।
जयप्रकाश भोक्ता : लोस चुनाव तक ये झाविमो के विधायक रहे। लोस चुनाव में झाविमो की स्थिति कमजोर देखी, पाला बदला और भाजपा में शामिल होकर टिकट ले लिया।
मधु त्रिपाठी : पहले भाजपा में आने की कोशिश की। सफल नहीं हुए। हाल में झाविमो में शामिल हुए और पांकी से उम्मीदवार बना दिए गए।
वीरेंद्र साहू : भाजपा में थे। टिकट नहीं मिला तो झाविमो में आ गए। गढ़वा से टिकट लिए और चल दिए।
रामचंद्र चंद्रवंशी : कल तक राजद में थे। इसी में रहते हुए यह झारखंड सरकार में मंत्री भी रहे। पाला बदला। भाजपा में आए और विश्रामपुर से उम्मीदवार बना दिए गए।
निर्भय शाहाबादी : ये भी उदयशंकर सिंह और जयप्रकाश भोक्ता की राह पर चले। भाजपा में शामिल हुए, गिरिडीह से उम्मीदवार बना दिए गए।
राधाकृष्ण किशोर : कभी कांग्रेस, फिर जदयू और हाल में कांग्रेस से भाजपा में आनेवाले किशोर छतरपुर से टिकट लेकर उड़ गए।
रामचंद्र केसरी : जदयू का झंडा ढोनेवाले रामचंद्र केसरी ने भी अंतिम समय में पाला बदला और भवनाथपुर से झाविमो के प्रत्याशी बन गए।
सत्यानंद भोक्ता : भाजपा से ऐन वक्त पर पाला बदला। झाविमो में शामिल हुए और चतरा से टिकट ले गए।
सत्येंद्र तिवारी : कुछ दिन पूर्व तक झाविमो के विधायक थे। काल और परिस्थिति के अनुसार पाला बदला और गढ़वा से भाजपा के प्रत्याशी बन गए।
चमरा लिंडा : ये निर्दलीय विधायक बने। लोकसभा चुनाव के समय टीएमसी में आए। उसके बाद हाल में पाला बदला और विशुनपुर से झामुमो के उम्मीदवार बन गए।
उदय शंकर सिंह : लोकसभा चुनाव में वह कांग्रेस के साथ रहे। मोदी की लहर दिखी तो भाजपा में आ गए। विधानसभा चुनाव की घोषणा हुई तो वह सारठ से भाजपा के प्रत्याशी बना दिए गए।
चंद्रिका महथा : चंद्रिका महथा झाविमो के विधायक थे। जमुआ से टिकट के लिए भाजपा में आए। टिकट नहीं मिला तो अंतिम समय में पाला बदला और झामुमो का टिकट लेकर चल दिए।
निजामुद्दीन अंसारी : झाविमो के विधायक थे। काफी दिनों से झामुमो के संपर्क में जरूर रहे लेकिन अंतिम समय में घर बदलते हुए राजधनवार से टिकट के लिए झामुमो चले गए।
टिकट की चाह में इन्होंने भी बदला घर
टिकट की चाह में इन लोगों ने भी अपना राजनीतिक घर अंतिम समय में बदल लिया है। कल तक आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो का दाहिना हाथ रहे नवीन जायसवाल ने हटिया सीट से टिकट के लिए और भाजपा से आए गणेश गंझू ने सिमरिया से टिकट के लिए झाविमो का दामन थाम लिया। झाविमो से भाजपा में आए अमित महतो ने सिल्ली से टिकट के लिए झामुमो का दामन थामा। जुगसलाई से टिकट के लिए भाजपा को छोड़ दुलाल कांग्रेस में आ गए। भाजपा के देवीधन बेसरा भी झामुमो के हो गए हैं।