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खुद दृष्टिहीन, पर दूसरों का सहारा बनने का सपना

8 वर्ष पहले
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रांची. वो गाते हैं तो समा बांध देते हैं। कंप्यूटर पर उंगलियां इतनी गति से चलती हैं कि देखने वाला देखता रह जाए। दूसरे की मदद का जज्बा ऐसा कि महिलाओं और दृष्टिहीनों के लिए एनजीओ बनाना उनका सपना है। ये सब तब जबकि वे देख नहीं सकते। पर, दृष्टिहीन राहुल कुमार मंडल ने आंखों की कमी को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने कंप्यूटर पर परीक्षा देकर दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से बॉटनी में एमएससी किया है। जबकि, कंप्यूटर का कभी कोई कोर्स नहीं किया।
वे फिलहाल एक ऐसा एनजीओ तैयार करने में लगे हैं, जिससे महिलाओं और दृष्टिहीनों को मदद मिल सके। लेकिन, उनके इस सपने के पूरा होने में उनकी कमजोर आर्थिक स्थिति बाधक है। इसके लिए उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर मदद मांगी, पर आज तक कुछ नहीं हुआ। यहां तक कि उनके कई एनजीओ प्रोजेक्ट की फाइलें मंजूरी के लिए समाज कल्याण विभाग में धूल फांक रही हैं।
विकलांगता पेंशन से चल रहा है गुजारा
राहुल अपना खर्च चलाने के लिए विकलांगता पेंशन पर निर्भर हैं। उन्होंने काफी पहले सुधीर कुमार महतो के यहां टेलीफोन ऑपरेटर का काम किया है, जब वे उप मुख्यमंत्री थे। काम छूट जाने के बाद उन्होंने दिल्ली जाकर कई एनजीओ में काम किया। अब वे अपने गृह राज्य में काम करना चाहते हैं।
जगजीत सिंह के साथ किया काम
राहुल ने प्रख्यात गजल गायक जगजीत सिंह के साथ काम कर चुके हैं। लेकिन, जिद है दृष्टिहीनों के गायक बनने की धारणा तोड़ने की। इसीलिए वह गायकी को पेशा नहीं बनाना चाहते। उनका कहना है कि मैं बताना चाहता हूं कि हम भी समाज में परिवर्तन ला सकते हैं।