पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Challenge To Unravel The Tangle Of Cabinet CM

मंत्रिमंडल की उलझनों को सुलझाना सीएम के लिए चुनौती, मंत्रिमंडल के विस्तार में हैं पेंच

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
रांची. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास अपनी सरकार को स्थाई और मजबूत करने में तो सफल रहे, परंतु अब अपने मंत्रिमंडल की उलझनों को सुलझाना भी उनके लिए बड़ी चुनौती होगी। रघुवर मंत्रिमंडल में सीएम सहित पांच विधायक मंत्री बन चुके हैं। मंत्री पद की सात सीटें अब भी खाली है। पहले इन सात सीटों में छह सीट भाजपा कोटे से तथा एक सीट आजसू के कोटे से भरना था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई है। झाविमो के छह विधायक भाजपा में शामिल हो गए हैं।
इन विधायकों को भी दो मंत्री पद दिए जाने की बात कही गई है। ऐसी स्थिति में भाजपा कोटे के किन दावेदारों का पत्ता कटेगा। आजसू कोटे का क्या होगा। इसके अलावा सीएम अपने मंत्रिमंडल में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन कैसे बिठा पाएंगे। यह उनके लिए चुनौती से कम न होगा। फैसला जो भी हो, उसपर सरकार और भाजपा के अंदर एक नया विवाद उभर सकता है।
मंत्री पद की दौड़ में पहले कौन थे शामिल
रघुवर दास के मंत्रिमंडल में शामिल होने की दौड़ में भाजपा के कई विधायक शामिल हैं। सात मंत्री पद की सीटों के लिए भाजपा के लगभग एक दर्जन विधायक प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। जातीय व क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर इनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। इनमें सरयू राय, राधाकृष्ण किशोर, नीरा यादव, योगेश्वर महतो बाटुल, विरंची नारायण, राज सिन्हा, राज पलिवार, अशोक भगत, मेनका सरदार, केदार हाजरा, सत्येंद्र नाथ तिवारी और शिवशंकर उरांव शामिल हैं।
अब कितने और जुड़ जाएंगे
झाविमो के छह विधायकों का पार्टी में शामिल हो जाने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि इनमें से दो विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में कहा जाए, तो भाजपा के 12 और झाविमो से टूटकर आए छह विधायक मंत्री पद के दावेदारों में शामिल हो गए हैं।
जातीय व क्षेत्रीय संतुलन बिठाने में होगी परेशानी
ऐसी स्थिति में भाजपा को जातीय व क्षेत्रीय संतुलन बनाने में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। जानकारी के अनुसार झाविमो से भाजपा में शामिल हुए दो विधायक नवीन जायसवाल और रणधीर सिंह को मंत्री बनाया जा सकता है। इस पूरे प्रकरण के सूत्रधार नवीन जायसवाल का मंत्री बनना तय माना जा रहा है। ऐसे में रांची जिला से ही दो विधायक मंत्री बन जाएंगे।
सीपी सिंह पहले से मंत्री हैं। साथ ही नवीन वैश्य जाति से हैं। ऐसे में विरंची नारायण और अशोक भगत की दावेदारी कमजोर पड़ सकती है। उसी तरह जानकी यादव को मंत्री बनाने पर नीरा यादव और अमर बाउरी को मंत्री बनाने पर राधाकृष्ण किशोर और केदार हाजरा की दावेदारी पर असर पड़ सकता है।
चौरसिया और गंझू को बोर्ड-निगम की चर्चा
आलोक चौरसिया और गणेश गंझू मंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं। जानकारी के अनुसार आलोक चौरसिया ने भाजपा के समक्ष जेएसएमडीसी का चेयरमैन बनाने की इच्छा व्यक्त की है। दोनो के मामलों में भाजपा काफी सोच-समझकर ही कोई फैसला लेगी।
आजसू कोटे का क्या होगा
रघुवर दास के मंत्रिमंडल में आजसू का दो सीटें देने की चर्चा थी। उसमें से एक चंद्रप्रकाश चौधरी ने तो मंत्री पद की शपथ ले ली। संभावना थी कि मंत्रिमंडल विस्तार में आजसू कोटे से एक और को मंत्री बनाया जाएगा। लेकिन बदली परिस्थिति में आजसू को एक और कोटा देना संभव नही दिखता। आजसू भी इसे महसूस कर रहा है। तभी तो आजसू पार्टी ने भी इस मामले में अपनी खामोशी तोड़ भाजपा को हिदायत दे डाली है। हालांिक अब भाजपा के लिए आजसू का समर्थन संख्या के हिसाब से जरूरी नहीं है।