रांची. राज्य में नकली दवाओं की जांच बंद हो गई है। स्टेट ऑफ आर्ट ड्रग लेबोरेटरी के पास केमिकल्स खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। लेबोरेटरी के निदेशक ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर केमिकल्स की कमी के कारण दवाओं की जांच बंद होने की सूचना दे दी है।
निदेशक ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के विद्यासागर को लिखे पत्र में कहा है कि पिछले पांच महीने में लेबोरेटरी को केमिकल्स खरीदने के लिए पैसे नहीं मिले। जो पैसे मिले, उसे भी ले लिया गया। इस महीने से कर्मचारियों का वेतन भी बंद हो जाएगा। ऐसे में लेबोरेटरी चलाना संभव नहीं है। लेबोरेटरी के बंद हो जाने से राज्य में एक बार फिर नकली दवाओं पर अंकुश लगाना संभव नहीं हो पाएगा।
क्या लिखा है ड्रग लेबोरेटरी निदेशक ने
लेबोरेटरी के निदेशक सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के विद्यासागर को लिखे पत्र में कहा है कि आपकी उपस्थिति में 12 अक्टूबर 2012 को प्रयोगशाला का उद्घाटन हुआ। नई प्रयोगशाला को चलाने के लिए अनेक प्रकार के मशीन, उपकरण की आवश्यकता होती है। प्रयोगशाला की मशीनों की रिपेयरिंग व मेंटेनेंस की भी आवश्यकता है। इन चीजों की सूची बनाकर निदेशक प्रमुख (औषधि) को दी गई। लेकिन आज तक सामान नहीं मिले।
केमिकल्स के लिए मिले रुपए वापस लिए
प्रयोगशाला में केमिकल्स आदि की खरीद के लिए नवंबर 2012 में लैब के एकाउंट में 40 हजार रुपए सरकार की ओर से दिए गए। टेंडर के बाद कंपनियों की ओर से यहां केमिकल्स की सप्लाई की गई। इसके बाद जांच शुरू की गई। हालांकि कंपनियों को उनका भुगतान नहीं किया गया। इस कारण उन्होंने केमिकल्स देना बंद कर दिया।
स्थिति यह है कि लेबोरेटरी में जरूरी केमिकल्स भी नहीं हैं। ऐसे में दवाओं की जांच बंद हो गई है। इधर, एनआरएचएम ने लैब प्रबंधन को सूचित किया है कि प्रयोगशाला को जो पैसे दिए गए थे, वे नियमानुकूल नहीं थे। ऐसे में उसे वापस लिया जा रहा है।
लैब के कर्मचारियों का वेतन भी बंद
पैसे की कमी के कारण लैब के कर्मचारियों का वेतन भी बंद हो गया है। निदेशक ने लिखा है कि लैब के लिए केमिकल्स की खरीद तो संभव नहीं हो पा रही, कंपनियों की ओर से जो केमिकल्स दिए गए हैं, उनका भुगतान भी नहीं हो पा रहा।
केमिकल्स नहीं, तो जांच कैसे
लैब के निदेशक सत्येंद्र सिन्हा ने कहा कि जब लेबोरेटरी में केमिकल्स ही नहीं होंगे, तो जांच कैसे होगी। बाजार दर पर 15 हजार रुपए के केमिकल्स खरीदने के लिए पावर देने पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। निदेशक ने स्वास्थ्य सचिव से इस दिशा में पहल करने की मांग की है।
एसके मुखोपाध्याय, निदेशक प्रमुख (औषधि)
केमिकल्स नहीं होने के कारण दवाओं की जांच बंद है, आप क्या कहते हैं?
निदेशक ने क्या लिखा है उससे मुझे मतलब नहीं है। लेबोरेटरी चलाना उनका काम है। वे चाहते हैं कि हमलोग उनके पीछे-पीछे चलें।
बात आवश्यक केमिकल्स की हो
रही है?
विभाग की कई बातें हैं, जो मैं आपको नहीं बता सकता।
जांच बंद हो गई, इसका खामियाजा जनता भुगतेगी। आप क्या कहते हैं?
जल्द ही केमिकल्स के लिए पैसे मिल जाएंगे। जांच जल्द शुरू होगी।