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डाउनलोड करेंरांची. छोटे बच्चों को दिए जाने वालेरेडी टू ईट पोषाहार (टेक होम राशन) की खरीद में बड़े घोटाले की तैयारी हो गई है। समाज कल्याण विभाग ने 750 करोड़ रुपए के पोषाहार का ठेका तीन खास कंपनियों को देने के लिए पहले टेंडर की शर्तें बदलीं। फिर नियम विरुद्ध जमीन अलॉट की और अब ठेका देने की प्रक्रिया चल रही है। शर्तें बदलने से टेंडर पेपर लेने वाली 18 अन्य कंपनियां दौड़ से अपने आप बाहर हो जाएंगी। ऐसी आशंका है कि प्रक्रिया पूरी होते-होते पोषाहार का यह ठेका बढ़कर करीब 1200 करोड़ रुपए का हो जाएगा।
समाज कल्याण विभाग ने 30 अगस्त 2012 को छह माह से तीन वर्ष के बच्चों को पोषाहार उपलब्ध कराने के लिए टेंडर निकालने का फैसला किया था। तब यह तय हुआ था कि पोषाहार की आपूर्ति के लिए राष्ट्रीय स्तर के योग्य और अनुभवी उत्पादनकर्ता का चयन किया जाएगा।
डेढ़ वर्ष तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद व्यवसायियों के खास ग्रुप को टेंडर देने के लिए नियम बदलते चले गए। आठ जनवरी 2014 को ऐसा टेंडर निकाला, जिसमें वही तीन कंपनियां क्वालीफाई कर सकती हैं, जिन्हें 20 दिसंबर 2013 को रांची औद्योगिक क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (रियाडा) की ओर से जमीन अलॉट की गई।
आश्चर्यजनक पहलू यह है कि टेंडर निकालने वाली समाज कल्याण निदेशक और जमीन अलॉट करने वाली रियाडा की एमडी एक ही अफसर हैं, पूजा सिंघल। हालांकि खुद को मीटिंग में व्यस्त बताते हुए उन्होंने मामले मेंं कोई बात नहीं की। उन्होंन कहा कि सचिव से बात करें।
आशंका
टेंडर प्रक्रिया पूरी होते-होते पोषाहार का ठेका बढ़कर हो सकता है त्र1200 करोड़ का
धोखा
नियमों में हेरफेर होने से टेंडर पेपर लेने वाली 18 कंपनियां हो जाएंगी दौड़ से बाहर
मनमानी
एक ही अफसर ने टेंडर निकाला और नियम विरुद्ध कर दी जमीन आवंटित
पहले यह था स्टैंड
सरकार ने 2012 में टेंडर करने का फैसला करते समय स्टैंड लिया था कि झारखंड में ऐसा कोई स्वयं सहायता समूह, महिला मंडल एवं सहकारिता संघ इस स्तर का नहीं है, जो पोषाहार की आपूर्ति कर सके। इसलिए, यह सामान सीधे उत्पादनकर्ता से लिया जाए। इसके लिए राष्ट्रीय टेंडर निकाला जाएगा।
फिर बदल दी शर्तें
नियम बदलने के करीब एक वर्ष बाद विभाग ने शर्त जोड़ दी कि वैसे ही उत्पादनकर्ता टेंडर में शामिल हो सकेंगे, जिनकी झारखंड में यूनिट होगी या यूनिट लगाने के लिए वे यहां जमीन ले लेंगे।
शर्त में यह भी जोड़ा गया कि कंपनी के पास न्यूनतम योग्यता नहीं होने पर सब्सिडीयरी कंपनी के अनुभव को मान लिया जाएगा।
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