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निगम में हंगामा, काम ठप कराने की धमकी, भिड़े जनप्रतिनिधि और अधिकारी

7 वर्ष पहले
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रांची. राजधानी के विकास का दारोमदार नगर निगम पर है। लेकिन निगम विकास छोड़, राजनीति का अखाड़ा बन गया है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की आपसी लड़ाई में जनता की समस्याएं गुम हो गईं हैं। निगम में सोमवार को भी विकट स्थिति देखने को मिली। शहर की सफाई के मामले पर मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों ने बैठक बुलाई थी। लेकिन बैठक में निगम सीईओ और पार्षद आपस में ही भिड़ गए। दोनों ओर से एक दूसरे पर भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोप भी लगे। आखिरकार सीईओ नाराज होकर बैठक से उठकर बाहर चले गए। एक समय दाेनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप इतना बढ़ गया कि एक दूसरे की देखने और दिखाने तक बात पहुंच गई।
ऐसे हुई हंगामे की शुरुआत
शहर की सफाई में कमीशनखोरी का आरोप लगने के बाद वार्ड 30 के पार्षद ओमप्रकाश ने सीईओ से मिलकर बताया कि इस तरह के दुष्प्रचार करने में निगम के अधिकारी शामिल हैं। बातचीत के दौरान ही पार्षद और सीईओ एकाएक उग्र हो गए। सीईओ ने कहा कि निगम के पदाधिकारियों को काम करने से मतलब है, इस तरह की ओछी राजनीति में पदाधिकारी शामिल नहीं होते। इस पर ओमप्रकाश सहित अन्य पार्षदों ने कहा कि जब पार्षद भ्रष्ट हैं, तो अधिकारी भी भ्रष्ट हैं। निगम में प्रत्येक टेबल पर हर काम के लिए कमीशन तय है। यह सुनते ही सीईओ नाराज होकर बैठक से निकल गए। इस पर पार्षद हंगामा करने लगे।
अब मामले को दबाने का प्रयास
मैंने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। न ही किसी पार्षद को कुछ कहा है। फिर भी एक पार्षद ने निगम के पदाधिकारियों पर कई गंभीर आरोप लगाए। ऐसा क्यो हो रहा है। इस मामले में मुझे कुछ नहीं कहना। '' मनोज कुमार, सीईओ निगम
निगम में छोटी मोटी बातें चलती रहती हैं। बातचीत के क्रम में ही माहौल कुछ गर्म हो गया था। भ्रष्टाचार के मामले को कुछ पार्षदों ने उठाया था। लेकिन मामला शांत करा दिया गया। ''
आशा लकड़ा, मेयर
स्टेडियम दुरुपयोग पर सुनवाई 16 अक्टू. को
झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा स्टेडियम के लिए ली गई जमीन के गलत उपयोग से संबंधित जनहित याचिका पर 16 अक्टूबर को सुनवाई होगी। पूर्व क्रिकेटर राकेश कुमार व अन्य की ओर से दायर याचिका में बताया गया है कि एसोसिएशन को स्टेडियम की जमीन खेल के लिए दी गई थी, पर वहां अब कंट्री क्रिकेट क्लब बनाकर, इंटरटेनमेंट कार्यक्रमों का आयोजन कर तथा शादी-ब्याह में पैसे लेकर स्थान दिए जा रहे हैं।
हर वार्ड के वृद्ध, विधवा और विकलांग को पेंशन
सभी 55 वार्ड में वृद्धों, विधवा और विकलांगों को पेंशन मिलेगी। लाभुकों का चयन पार्षदों द्वारा किया जाएगा। वर्ष 2010 में किए गए बीपीएल सर्वे के आधार पर पार्षद अपने-अपने क्षेत्र से लाभुकों का चयन कर जिला प्रशासन को रिपोर्ट भेजेंगे। लाभुकों के चयन को लेकर डीसी विनय कुमार चौबे ने सोमवार को निगम कार्यालय में पार्षदों के साथ बैठक की।
उन्होंने कहा कि जो बीपीएल सूची पहले से बनी हुई है। उसी बीपीएल नंबर के परिवार के वृद्धों और विधवा का फॉर्म भरकर दें। वहीं, अपने वार्ड में विकलांगों को चिह्नित कर, इसकी सूचना प्रशासन को दें। प्रशासन की ओर से चयनित लाभुकों को पेंशन देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। मौके पर मेयर आशा लकड़ा, डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय व पार्षद उपस्थित थे।