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घटना के 37 दिन बाद पुलिस ने दर्ज किए बयान

8 वर्ष पहले
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रांची. आखिरकार 37 दिन बाद बुधवार को बड़ा तालाब बोट हादसे के पीडि़त और चश्मदीदों के बयान पुलिस ने दर्जकर लिए। वह भी खुद उनकी ही पहल पर। हादसा 15 दिसंबर को हुआ था। हादसे में करने वालों के परिजन बुधवार को खुद कोतवाली थाने पहुंचे और सब इंस्पेक्टर व अनुसंधानकर्ता रामबाबू शर्मा से कहा कि उनके बयान क्यों दर्ज नहीं किए जा रहे। पुलिस क्यों हादसे के जिम्मेवार को बचा रही है।

पीडि़तों के दबाव बनाने पर पुलिस ने बयान दर्ज किए। पुलिस ने सभी पांचों चश्मदीदों के अलग-अलग बयान लिए। सभी ने एक सुर में तत्कालीन पर्यटन सचिव सजल चक्रवर्ती को ही घटना का जिम्मेवार ठहराया। चश्मदीद अमृता बनर्जी ने बयान में कहा कि 15 दिसंबर की घटना में उनका इकलौता भाई सागरमय बनर्जी और उसकी पत्नी पूजा की मौत हो गई। मना करने पर भी सजल चक्रवर्ती ने बोट चलाई। उनके खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई होनी चाहिए।

मामले के अनुसंधानकर्ता रामबाबू शर्मा ने कहा कि अब तक पार्क के संचालक गौतम चटर्जी के बयान का इंतजार कर रहे थे, जो अब हो चुका है। वह मामले में प्रथम आरोपी हैं। अब चश्मदीद के बयान मिल गए हैं। इसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

सजल ने नहीं निभाई पद की जिम्मेदारी

कांटाटोली निवासी तुषार व नवोनिता नायक की चार वर्षीय बेटी सना की मौत इस हादसे में हुई थी। दोनों बयान में कहा कि उनकी बेटी की मौत के लिए सजल चक्रवर्ती जिम्मेवार हैं। राजा डे ने भी पुलिस को दिए लिखित बयान दिया कि पूरी घटना उनके कारण ही घटी। उन्होंने भी कार्रवाई करने की मांग की। सम्राट चटर्जी ने भी घटना के लिए सजल को जिम्मेवार बताया है। उन्होंने भी अपना लिखित बयान पुलिस अधिकारी को दिया है। सभी चश्मदीद ने बुधवार को एसएसपी, सिटी एसपी और डीएसपी को भी बयान की प्रति दी है।