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आज बंद रहेंगी दवा दुकानें

8 वर्ष पहले
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रांची। झारखंड सहित पूरे देश की थोक और खुदरा दवा दुकानों के शटर शुक्रवार को नहीं उठेंगे। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर सभी दवा दुकानें बंद रहेंगी। इमरजेंसी की स्थिति में भी कोई दवा दुकान नहीं खुलेगी। बंदी नई दवा नीति के विरोध में आहूत की गई है। इस दौरान दवा विक्रेता राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना और प्रदर्शन करेंगे।

इस दौरान इमर्जेंसी सेवाएं भी स्थगित रहेंगी। एसोसिएशन की मांगों में नई दवा नीति में दवा विक्रेताओं का मुनाफा यथावत रखने, फार्मासिस्ट्स की समस्या का अविलंब निराकरण करने, दवा कानून संशोधन 2008 में सुधार करने, आम जनता को जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने और दवा व्यवसाय में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का विरोध शामिल है।
इसलिए कर रहे हैं विरोध दवा व्यवसाय से जुड़े थोक व्यापारियों को वर्तमान में 10 फीसदी और खुदरा व्यापारियों को 20 फीसदी कमीशन मिल रहा है।

केंद्र सरकार ने नई दवा नीति के तहत शिड्यूल दवाओं पर थोक विक्रेताओं का कमीशन घटाकर आठ फीसदी और खुदरा विक्रेताओं का कमीशन 16 फीसदी करने का निर्णय लिया है। दवा विक्रेताओं का कहना है कि सरकार ने दवा निर्माताओं को 300 फीसदी तक मुनाफा रखने की छूट दे दी है। लेकिन छोटे व्यवसायियों का कमीशन कम करने का निर्णय लिया है। पिछले 25 वर्षों से कमीशन में किसी तरह की वृद्धि नहीं की गई है। ऐसे में सरकार कमीशन बढ़ाने की बजाए कम कर रही है। इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

क्या है मामला
वर्ष 1980 में हाथी कमीशन ने दवाओं के दाम निर्धारित करते वक्त ड्रग प्राइस कंट्रोल का प्रावधान रखा था। उस समय देश में शिड्यूल में 74 और नन शिड्यूल में करीब 650 दवाएं थीं। इसके तहत निर्माता और उत्पादक को 100 फीसदी मुनाफा लेने की बात कही गई थी। सरकार को 1994 में ड्रग प्राइस कंट्रोल एक्ट में सुधार लाने का सुझाव दिया गया। इसके लिए 1999 में कमेटी बनी। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. जी सिंह के नेतृत्व वाली कमेटी ने फरवरी 2013 में अपनी रिपोर्ट दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार दवा विक्रेताओं का कमीशन कम करने की बात कही गई है।

प्रताडि़त कर रही है सरकार
केंद्र और राज्य सरकारें हर दवा दुकान में फार्मासिस्ट रखने की बात कहकर दवा विक्रेताओं को प्रताडि़त करती रही हैं। झारखंड में अभी 18,465 दवा दुकानें हैं। इनमें दो हजार थोक और 16 हजार खुदरा विक्रेता हैं। राज्य में अभी मात्र 781 रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हैं। अगर दवा दुकान में नियुक्त फार्मासिस्ट मरीज को गलत दवा देता है, तो जिम्मेवार दवा दुकान मालिक को ठहराया जाता है। यह अन्याय है। अमर कुमार सिन्हा, महासचिव, केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसो.

सरकार की नीति का विरोध
सरकार दवा निर्माता कंपनियों का मुनाफा 300 फीसदी करने जा रही है और छोटे दवा विक्रेताओं का कमीशन कम कर रही है। सरकार की इस नीति का हम विरोध कर रहे हैं। हड़ताल के दौरान देशभर की 7,73,537 दवा दुकानें बंद रहेंगी। इससे आम जनता प्रभवित होगी। ऐसे में दवाओं की निर्बाध आपूर्ति कराना सरकार का दायित्व है। दवा विक्रेताओं को वर्षों पुराने कानून के आधार पर परेशान किया जा रहा है।जेएस शिंदे, अध्यक्ष, ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसो.
सरकारी अस्पतालों को छोड़ वैकल्पिक व्यवस्था कहीं नहीं, इमर्जेंसी सेवाएं भी ठप रहेंगी