रांची. निगरानी की लापरवाही से करोड़ों का खेल हुआ। 34वें नेशनल गेम्स घोटाले से जुड़ा यह नया सनसनीखेज खुलासा हुआ है। गेम्स शुरू होने से दो साल पहले जून-2009 में ही अनियमितता की शिकायत निगरानी ब्यूरो में पहुंच गई थी। नेशनल गेम्स आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष आरके आनंद ने इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। निगरानी थाने ने इस प्रारंभिक जांच (पीई) संख्या 46/09 तो दर्ज कर ली थी, लेकिन जांच शुरू नहीं की। वर्ष 2010 में हाईकोर्ट ने इस मामले में निगरानी को जांच का निर्देश दिया। इसके बाद निगरानी ने कांड संख्या 49/10 दर्ज की और जांच शुरू की।
आनंद ने पूछा- क्या हुआ मेरी शिकायत का
निगरानी के सवालों का जवाब देने के लिए आरोपी आरके आनंद आठ दिसंबर को रांची पहुंचे। उनसे 30 बिंदुओं पर सवाल पूछे गए। जवाब देने के दौरान ही आनंद ने जांच पदाधिकारी एएसपी आनंद जोसेफ तिग्गा से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि वर्ष 2009 में ही उनके द्वारा दर्ज कराई गई अनियमितता से संबंधित शिकायत का क्या हुआ। जांच अब तक कितनी आगे बढ़ी है?
बड़ी गड़बड़ी का किया था खुलासा
वर्ष 2009 में निगरानी थाने में दर्ज पीई में आरके आनंद ने कहा था कि वर्ष 2011 में आयाेजित होने वाले नेशनल गेम्स के लिए खरीदे जानेवाले खेल सामग्री व उपकरण में भारी वित्तीय अनियमितता बरती जा रही है। एनजीअोसी के महासचिव एसएम हाशमी, खेल निदेशक पीसी मिश्रा, भारतीय ओलिंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी टेंडर कमेटी में उलटफेर कर एक खास कंपनी से सामान खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। उन कंपनियों को ठेका देने की तैयारी की जा रही है, जो पदाधिकारियों के चहेते से जुड़े हुए हैं।
करोड़ों के ठेके पर भी उठाए थे सवाल
आनंद ने कहा था कि एक्रीडेशन के नाम पर
कोलकाता की कंपनी सीएमसी को 10 करोड़ रुपए का ठेका दिया गया है, जो गलत है। वहीं इवेंट मैनेजमेंट के लिए आठ करोड़ रुपए का ठेका दिया गया। जबकि जिस कंपनी का टेंडर फाइनल हुआ था, वह चार करोड़ में ही काम करने को तैयार थी। जेनरेटर के लिए तीन करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। ट्रांसपोर्ट के लिए भी गलत तरीके से कंपनी का चयन किया गया।
सेरेमनी-कैटरिंग में डूबे 5.50 करोड़
ओपनिंग एंड क्लोजिंग सेरेमनी के लिए ब्रिलिएंट इंटरटेनमेंट नेटवर्क्स प्रा. लि., नई दिल्ली को सात करोड़ में काम नहीं दिया। टेंडर कमेटी ने एल-टू कंपनी विजक्राफ्ट इंटरनेशनल को नौ करोड़ रुपए में ठेका दे दिया। कैटरिंग में मनमानी तरीके से ठेका दिया गया, जिससे तीन करोड़ का नुकसान हुआ।
आगे क्या 2009 में आरके आनंद द्वारा दर्ज कराई गई पीई 49/9 को घोटाले से संबंधित दर्ज कांड संख्या 49/10 में मर्ज किया जाएगा। इसके बाद इसके अनुसंधानकर्ता वर्तमान जांच पदाधिकारी एएसपी आनंद जोसेफ ही होंगे।
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को गुमराह किया। सरकार ने कोर्ट को यह नहीं बताया कि 2009 में ही निगरानी ब्यूरो में पीई दर्ज है। सूचना के अभाव में भोला नाथ सिंह की याचिका पर हाईकोर्ट ने निगरानी को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद ही कांड 49-10 दर्ज किया गया है। -आरके आनंद