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डाउनलोड करेंरांची. चार विश्वविद्यालय में वीसी व प्रोवीसी की नियुक्ति के लिए गठित सर्च कमेटी पर विवाद और बढ़ गया है। शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव ने गुरुवार को स्पष्ट कहा कि वे राजभवन द्वारा तैयार पैनल को स्वीकृति नहीं देंगी। इस पैनल के आधार पर किसी भी हालत में नियुक्ति नहीं होने दी जाएगी।
शिक्षामंत्री गुरुवार को अपने आवास पर शिक्षाविदों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर रही थीं। उन्होंने कहा कि राजभवन द्वारा गठित सर्च कमेटी का गठन यूजीसी और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार नहीं हुआ है। वे इस मामले में शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलेंगी। राज्यपाल डॉ. सैयद अहमद के रांची लौटने पर उनसे भी बातचीत की जाएगी। बाद में जिला स्कूल में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में भाग लेने आईं शिक्षामंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में फिर दोहराया कि वे अपने फैसले पर अडिग हैं। उन्हें जो कहना था, पहले ही कह दिया है।
राजभवन के सामने 3 को धरना
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सरकार को दो दिन का समय दिया गया है। इस दौरान समस्या का समाधान नहीं हुआ तो तीन फरवरी को राजभवन के सामने धरना दिया जाएगा। साथ ही राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में डॉ. करमा उरांव, डॉ. दिवाकर मिंज, डॉ. नारायण भगत, डॉ. राम किशोर भगत, प्रो. राजेश कुजूर, धर्म गुरु बंधन तिग्गा व जतरू उरांव शामिल थे।
इंटरव्यू के बाद शुरू हुआ विवाद
विश्वविद्यालयों में वीसी व प्रोवीसी पद पर नियुक्ति के लिए चार महीने पहले राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन जारी किया गया था। इसके बाद सर्च कमेटी बनाई गई। कमेटी ने 25 जनवरी को 66 अभ्यर्थियों को न्याय सदर डोरंडा में इंटरव्यू (इंट्रैक्शन मीटिंग) के लिए बुलाया। इसमें 57 अभ्यर्थी शामिल हुए। इंटरव्यू के बाद कमेटी ने 25 अभ्यर्थियों का पैनल राजभवन को सौंप दिया। तब तक सब चुप थे। जब नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंची तो विरोध शुरू हो गया।
क्या है मामला
झारखंड विश्वविद्यालय अधिनियम में वीसी व प्रो वीसी की नियुक्ति का प्रावधान है। अधिनियम के तहत राज्यपाल सरकार की सहमति से इन पदों पर नियुक्ति करते हैं। 2013 में इस अधिनियम में संशोधन किए बगैर सर्च कमेटी गठित कर दी गई। इस पर विवाद खड़ा हो गया।
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