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रुपए दीजिए और जमीन की लगान रसीद लीजिए, दलाल ही मांगता है पैसे

7 वर्ष पहले
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रांची. यह है शहर अंचल के बूटी मोड़ स्थित तहसील कचहरी। यहां पर कर्मचारी और दलाल दोनों साथ-साथ बैठक लगान रसीद काटते हैं। इतना ही नहीं अंचल के मुख्य गेट पर ताला लगाकर बड़े इत्मीनान से अंदर में सारा खेल चल रहा है। किस रसीद पर कितना पैसा लेना है, यह दलाल तय करते हैं। सीओ शहंशाह अली के नाम पर पैसे की मांग की जा रही है।
पैसा नहीं दिया तो फिर हर मंगलवार और गुरुवार को दौड़ते रहिए। काम बन जाए तो भगवान से भेंट हो जाए। लोगों की शिकायत पर भास्कर पिछले दिन तहसील पहुंचा तो जैसी शिकायत मिली थी, वैसा ही काम यहां हो रहा था। हैरानी की बात है कि यह तो एक बानगी है। जिले के सभी अंचल और तहसीलों की लगभग यही स्थिति है। इसका खुलासा अभी हाल ही में ग्रामीण विकास मंत्री केएन त्रिपाठी ने ओरमांझी अंचल के औचक निरीक्षण के दौरान किया था। उन्होंने कहा था कि सीओ पैसे लेते हैं। अफसर और कर्मचारियों में भय नहीं है। वे बेखौफ होकर काम के बदले पैसे का लेनदेन कर रहे हैं। यहां तो रसीद काटने के लिए एक काउंटर खुला है, बाकी सभी बंद है। कहा जा रहा था कि दो बजे के बाद आइए। सप्ताह भर इंतजार के बाद भी लोग चुपचाप तहसील ऑफिस के इधर-उधर बैठकर दो बजने का इंतजार करते हैं। जब काउंटर दो बजे खुलता है तो पांच छह रसीद कटा और फिर काउंटर बंद।
दोपहर दो बजे काउंटर खुला, 5-6 रसीद काटने के बाद फिर बंद
दिन के 10 से दो बजे तक इधर-उधर बैठकर लोग काटते हैं समय
सीओ के नाम पर भी मांगे जाते हैं पैसे
कौन है पंडित, राजेश और संतोष
तहसील पर पूरी तरह से दलालों का कब्जा है। कर्मचारी बाद में आते हैं, लेकिन दलाल पहले से ताला खोलकर अंदर घुसे रहते हैं। सवाल यह है कि आखिर इनके पास चाबी कहां से आई। लोगों ने कहा कि पंडित, राजेश, मनोज, संतोष समेत अन्य लोग कर्मचारियों के साथ बैठकर रसीद काटते हैं। सरकारी फाइलें डील करते हैं। काम कराने के लिए खुलेआम पैसे की डील की जाती है।
क्या कहते हैं भुक्तभोगी
हिनू के रामजनम सिंह कहते हैं कि मंगलवार का इंतजार था। रसीद कटावाना था। यहां पहुंचा तो कहा गया कि दो बजे काउंटर खुलेगा। इस मनमानी से बड़ी परेशानी हो रही है।
डिबडीह के अशोक प्रसाद ने कहा कि मुझे राष्ट्रीयता प्रमाण पत्र बनवाना है। कल आया था तो कर्मचारी ने कहा था कि मंगलवार को आइएगा। 12 बज रहा है, पर काउंटर नहीं खुला है।
क्या कहते हैं अिधकारी
अंदर कौन बैठता है। यह पता करके ही बता सकते हैं। क्योंकि मुझे इसकी जानकारी नहीं है। काम का ओवरलोड है, इसलिए तो पूरे सिस्टम को कंप्यूटराइज्ड करा रहा हूं। फिर भी मैं देखता हूं, क्या मामला है। विनय कुमार चौबे, उपायुक्त
मेरे नाम से कोई पैसा मांगता है, यह मैं कैसे बता सकता हूं। कर्मचारियों को समय पर बैठना है। अगर, वे नहीं बैठते हैं तो पूछेंगे। बाहरी व्यक्ति का अंदर में प्रवेश वर्जित है। कार्यालय को समय पर खोलना है। शहंशाह अलीे, सीओ शहर अंचल।