रांची. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य में नया सचिवालय, हाईकोर्ट और नई राजधानी विकसित करने के लिए केंद्र से विशेष पैकेज की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसमें खर्च होने वाली राशि का जुगाड़ करना राज्य सरकार के लिए संभव नहीं है। रघुवर दास रविवार को दिल्ली में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में झारखंड का पक्ष रख रहे थे।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को आर्थिक मदद करती रही है। लेकिन, जरूरत इस बात की है कि राज्यों की सुदृढ़ता, संसाधनों की उपलब्धता, पिछड़ापन और स्थानीय जरूरतों के आधार पर केंद्रीय मदद का फॉर्मूला तय हो।
संपूर्ण वार्षिक योजना आकार का लगभग एक तिहाई हिस्सा केंद्र से मिलता है, लेकिन योजना विशेष को लागू करने में कई शर्तें रहती हैं। ये शर्तें पूरे देश के लिए एक जैसी होती हैं, जबकि हर जगह की भौगोलिक व सामाजिक-आर्थिक स्थिति अलग-अलग होती है। उदाहरण के तौर पर एआईबीपी के तहत केंद्र 10 हेक्टेयर पटवन क्षमता वाली योजनाओं के लिए मदद करता है। जबकि झारखंड में 10 हेक्टेयर समतल भूमि चिह्नित करना मुश्किल है।
बाजार दर पर मिले कोयले की रॉयल्टी
मुख्यमंत्री ने कोयले के ई-ऑक्सन में राज्यों को भागीदार बनाने का समर्थन किया। साथ ही कोयले की रॉयल्टी 20 फीसदी कर बाजार दर पर रॉयल्टी देने की मांग की।
औद्योगिक उत्पादों को जीएसडीपी से जोड़ना गलत
रघुवर ने कहा कि केंद्रीय संसाधनों के वितरण मानकों में पुनर्विचार की जरूरत है। कोयला, लोहा व अन्य खनिजों पर आधारित उद्योगों के उत्पाद को राज्य के जीएसडीपी से जोड़ दिया जाता है। इससे राज्य की प्रति व्यक्ति आय बढ़ जाती है, मगर जनता को कोई लाभ नहीं होता।