रांची. अब सरकारी कामकाज में राज्य के भीतर उत्पादित सामानों को छोड़कर अफसरों द्वारा ब्रांडेड और मनपसंद सामग्री खरीदने पर रोक लगने वाली है। स्टील फर्नीचर, रैक, ट्रंक, आलमारी, चेयर, ऑफिस स्टेशनरी, कंप्यूटर स्टेशनरी से लेकर ट्रांसफार्मर, डीप वेल हैंडपंप, फ्लाई ऐश ब्रिक्स, पीसीसी पोल, ह्यूम पाइप, पीवीसी पाइप, अलुमिनियम वायर, सोलर लालटेन, स्ट्रीट लाइटिंग, सोलर वाटर हीटर, गिजर, सोलर इरीगेशन पंप, कृषि संयंत्र जैसे कई सामानों की खरीद राज्य के छोटे और मध्यम उद्योगों से ही की जाएगी। राज्य सरकार ने नई औद्योगिक नीति (2012) के तहत झारखंड खरीद नीति (प्रिक्योरमेंट पॉलिसी) तैयार की है।
राज्यपाल के सलाहकार मधुकर गुप्ता ने उद्योग विभाग द्वारा बनाए गए झारखंड खरीद नीति के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है। इसमें वैसे समान जो राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों द्वारा बनाए जाते हैं, उसे खरीदना अनिवार्य किया गया है। खरीद नीति में ऐसी कई सामग्री को रिजर्व कैटेगरी में रखा गया है।
सलाहकार की मंजूरी के बाद एकबार फिर विभिन्न उद्यमी प्रतिनिधियों को इस खरीद नीति का ड्राफ्ट भेजा गया है। विभाग ने पहले भी इस खरीद नीति की रूपरेखा तैयार कर चैंबर ऑफ कामर्स समेत अन्य उद्यमियों से सलाह मशविरा किया था।
ये होगी प्रक्रिया
ड्राफ्ट पर कमेंट्स आने के बाद विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक बैठक होगी। जरूरी प्रक्रिया पूरी कर उद्योग विभाग एक संलेख बनाएगा। उस पर परामर्शी परिषद की स्वीकृति मिलने के बाद राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उसके बाद विभाग इस प्रिक्योरमेंट पॉलिसी को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करेगा।
औद्योगिक नीति में है प्रावधान
नई औद्योगिक नीति के 18वें पारा में है कि राज्य के भीतर सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों के प्रोत्साहन और सहायता के लिए एक नीति बनेगी। सरकारी खरीद में ऐसी इकाइयों के ़सामानों को प्राथमिकता मिलेगी। राज्य खरीद नीति इसी के तहत बनाई गई है। यह नीति सरकारी कार्यालयों समेत बोर्ड, निगम, आयोग एवं वैसे कार्यालय जहां 50 फीसदी सरकारी निवेश है वहां भी लागू होगा।
पहले क्या था प्रावधान
अब तक राज्य में वर्ष 2007 में बनी क्रय नीति लागू है। इसमें स्थानीय उद्यमियों को अधिमानता और एल-वन से 10 फीसदी से अधिक दर होने पर सामान आपूर्ति करने की छूट थी। लेकिन इस बार कई आयटम को राज्य के भीतर सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों के लिए रिजर्व कर दिया गया है।
क्या पड़ेगा असर
यह खरीद नीति अगर कारगर ढंग से लागू हुई तो बड़े-बड़े दफ्तरों में भी ब्रांडेड कुर्सी, टेबल, आलमीरा, चेयर, अलुमिनियम वायर इत्यादि नहीं दिखेगा। ये सामग्री दूसरी कंपनियों से खरीदना अब अधिकारियों को मुश्किल होगा। राज्य के सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों की स्थिति सुधरेगी। इनका कारोबार बढ़ेगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी। सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों की संख्या बढ़ेगी। इनकी क्वालिटी में सुधार होगा।
स्थानीय उद्यमियों से खरीदे जाएंगे ये सामान
कृषि संयंत्र, बस, ट्रक बॉडी, पीवीसी टैंक, स्टील फर्नीचर, रैक, ट्रंक, आलमारी, मैनुअल ट्रॉली, पेसेंट ट्रांसफर ट्रॉली, ट्रांसफार्मर (200 केवीए का), डीप वेल हैंडपंप, कॉपी, ऑफिस स्टेशनरी, कंप्यूटर स्टेशनरी, फ्लाई ऐश ब्रिक्स, पीएससी पोल, ह्यूम पाइप, पीवीसी पाइप, अलुमिनियम वायर, सोलर लालटेन, स्ट्रीट लाइटिंग, सोलर वाटर हीटर, गिजर, सोलर इरीगेशन पंप, फ्लोर ग्राइंडिंग, सर्जिकल कॉटन, गॉज, बैंडेज, पेंट एंड वार्निश, सेफ्टी बुट, लेदर बुट एंड कैनवास शू, एरिगेशन शटर, पैनल गेट, सोडियम सेलिकेट, रैक्स कैंडल, फिनाइल, इमरजेंसी लाइट, झारक्राफ्ट एंड खादी बोर्ड का साबुन, लाह और उसके उत्पादित सामान, झारक्राफ्ट और खादी उद्योग के बांस, बेंत और लकड़ी के फर्नीचर, जूट बैग इत्यादि।
क्या कहते है उद्योग सचिव
उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा : एपी सिंह
प्रोक्योरमेंट पॉलिसी के ड्राफ्ट पर राज्यपाल के सलाहकार ने सहमति दे दी है। पॉलिसी लागू करने को लेकर कार्रवाई हो रही है। इस पर उद्यमियों एवं आम जनों से कमेंट मांगा गया है। तार्किक सुझाव पर भी विचार किया जाएगा। परामर्शी परिषद की मंजूरी लेने से पहले विकास आयुक्त के स्तर पर भी एक बैठक होगी। प्रिक्योरमेंट पॉलिसी को ट्रांसपेरेंट तरीके से बनाया गया है। सबकी सहभागिता हो यह कोशिश की गई है। इस प्रिक्योरमेंट पॉलिसी के लागू होने से औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में उत्पादित सामानों की खपत होगी।
क्या कहते हैं लघु उद्यमी
अच्छा कदम है : शरद पोद्दार
प्रोक्योरमेंट पॉलिसी देर से उठाया गया अच्छा कदम है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयों को इससे लाभ मिलेगा। पहले भी सरकार ने नीति बनाई थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे तवज्जो नहीं दिया। इस नीति को पूरी तरह से अधिकारी लागू करें। इस प्रिक्योरमेंट पॉलिसी पर पहले भी कमेंट दिया गया था। फाइनल स्टेज में फिर मांगा गया। यह ड्राफ्ट मोटे तौर ठीक है। जो कुछ सुझाव देना है दो-तीन दिनों में दे देंगे।