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न विधायक और न सांसद, दो दिन में मिला सरकारी आवास

7 वर्ष पहले
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रांची. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखदेव भगत राज्य के पहले ऐसे व्यक्ति बन गए हैं, जिन्हें अहर्ता पूरी न होने पर भी राजधानी में सरकारी आवास मिल गया। सरकार ने उन्हें दीनदयाल नगर में सहायक अभियंता आवास संख्या-3 के नाम से चिह्नित आवास आवंटित किया है। पहले यह आवास आजसू पार्टी के अध्यक्ष व विधायक सुदेश कुमार महतो के नाम से आवंटित था। अब सुखदेव भगत कुछ दिन पहले इसमें रहने भी लगे हैं। सरकार इस आवास का नए सिरे से रंग-रोगन और मरम्मत भी करा रही है।

राज्य सरकार ने गुरुजी शिबू सोरेन को भी राजधानी में मुफ्त आवास मुहैया कराया है। लेकिन, वह झारखंड आंदोलन के सबसे बड़े नेता हैं।इसलिए उनका राज्य में अलग ही सम्मान है। इसके लिए भी सरकार के शीर्ष स्तर पर कैबिनेट में फैसला लिया और उसके बाद उन्हें आवास मुहैया कराया गया था।

इन्हें है अधिकार

राज्य सरकार के अधिकारी, कर्मचारी, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक या केंद्र सरकार का कोई ऐसा अधिकारी, जिसे राज्य सरकार जरूरी समझती है।

इन्हें नहीं है अधिकार

गैर विधायक, किसी पार्टी के नेता, बोर्ड-निगम, लोक उपक्रम, पर्षद, अद्र्धसरकारी संस्थान के गैर सरकारी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष अथवा उसके गैर सरकारी कर्मी।

सैकडों आवेदन वर्षों से लंबित

राज्य में नई सरकार बनने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखदेव भगत को दो दिनों में आवास मुहैया करा दिया गया। उन्होंने 31 अगस्त 2013 को सीएम को एक पत्र लिखा था कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उनका राज्य के विभिन्न हिस्सों में दौरा बढ़ गया है। वह नक्सली इलाके से हैं और उन्हें नक्सलियों से खतरा है। इसलिए राज्य सरकार उन्हें राजधानी में सरकारी आवास मुहैया कराए। इसके दो दिन बाद ही दो सितंबर 2013 को उन्हें विभाग ने अधिसूचना जारी कर आवास आवंटित कर दिया। उधर, भवन निर्माण विभाग में सरकार के कर्मचारियों-अधिकारियों के सौ से अधिक आवेदन वर्षों से लंबित हैं। उन्हें आवास नहीं मिल सका है।

सबसे बड़ा सवाल

प्रदेश के कई ऐसे गैर विधायक नेता हैं, जो नक्सली क्षेत्र से आते हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रवींद्र राय भी गिरिडीह जिले से आते हैं, जो अति प्रभावित नक्सली इलाका है। इसी तरह प्रदेश राजद अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह भी नक्सल प्रभावित गढ़वा जिले के हैं। कई और ऐसे नेता हैं, जो विधायक नहीं है। पर नक्सल क्षेत्र से हैं। ऐसे में सिर्फ सुखदेव भगत को सरकारी आवास मिलना कितना उचित है?

सुरक्षा के लिए मांगा था आवास : भगत

सुखदेव भगत का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें नक्सली धमकियां मिल रही थीं। डीजीपी को भी नक्सली धमकी मिलने की उन्होंने जानकारी दी थी। उसी के बाद राज्य सरकार से उन्होंने सुरक्षा के दृष्टिकोण से आवास मुहैया कराने का आग्रह किया। इसके बाद ही आवास आवंटित हुआ।

मेरे पास नहीं आई फाइल : अंसारी

भवन निर्माण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी का कहना है कि उनके पास तो सुखदेव भगत को आवास आवंटन संबंधी फाइल भी नहीं आई। अब कैसे सरकारी आवास दे दिया गया, इसकी वह जांच कराएंगे। देखेंगे कि आवास कैसे मिला। गैर विधायक को तो आवास नहीं मिलना चाहिए।

राजबाला बोलने को भी तैयार नहीं

भवन निर्माण विभाग की प्रधान सचिव राजबाला वर्मा इस संबंध में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुईं। संवाददाता ने उनसे फोन पर, फिर व्यक्तिगत रूप से प्रोजेक्ट भवन स्थित उनके कार्यालय कक्ष में मिलने का काफी प्रयास किया। लेकिन, उन्होंने मिलने और इस मुद्दे पर बात करने से मना कर दिया।