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पीढ़ियां गुजर जाएंगी ऐसे, रेल परियाेजनाओं पैसा व जमीन दे सरकार

7 वर्ष पहले
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रांची. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को कहा कि आखिर झारखंड की लंबित परियोजनाएं कब तक पूरी होंगी। किसी भी परियोजना की अवधि इतनी लंबी नहीं होनी चाहिए कि उसे पूरा होने में पीढ़िया गुजर जाएं। उन्होंने कहा कि राज्य में 565 किमी रेल मार्ग का निर्माण होना है। इसके लिए सरकार ने दो हजार करोड़ रुपए दे चुकी है, लेकिन अब तक मात्र 365 किमी रेलवे ट्रैक ही बिछाया जा सका है। समय पर परियोजनाएं पूरी नहीं होने के कारण इसकी लागत छह हजार करोड़ रुपए हो चुकी है। यह झारखंड पर अतिरिक्त बोझ है। प्रोजेक्ट भवन स्थित सीएम कार्यालय कक्ष में हेमंत ने कहा कि अब तक राज्य सरकार द्वारा दी गई राशि का उपयोगिता प्रतिवेदन रेलवे बोर्ड ने उपलब्ध नहीं कराया है। कई प्रोजेक्ट पर एक साथ काम करने से बेहतर होगा कि जो परियोजना लगभग पूरी होने को है, बोर्ड उसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा करे।
पीएम से करेंगे भेंट
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे और रेलवे बोर्ड के कारण राज्य सरकार पर पड़ने वाले अतिरिक्त खर्च का भार भारत सरकार द्वारा उठाने का अनुरोध करेंगे।
ये परियोजनाएं हैं लंबित
कोडरमा-हजारीबाग-रांची लाइन (200 किमी), कोडरमा-गिरिडीह (110 किमी), कोडरमा-तिलैया (14 किमी), दुमका-रामपुर हाट (64 किमी), रांची-लोहरदगा-टोरी (113 किमी) सहित एक अन्य।
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अरुणेंद्र कुमार ने सोमवार को कहा कि झारखंड की छह महत्वपूर्ण रेल परियोजनाएं जमीन और राशि मुहैया नहीं कराए जाने के कारण लंबे समय से अटकी हुई हैं। राज्य सरकार जितनी जल्दी जमीन और पैसा उपलब्ध कराएगी, उतनी तेजी से काम पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन सभी परियोजनाएं पूरी करने के लिए झारखंड सरकार से एमओयू किया गया है। रेलवे को जब तक जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाएगी, पटरी बिछाने का काम कैसे पूरा हो सकेगा। राज्य सरकार ने तीन वर्ष से राशि भी नहीं दी है। एक अप्रैल को राशि दे देनी थी, लेकिन अब तक दी जा सकी है। ऐसे में काम कैसे आगे बढ़ेगा। बोर्ड चेयरमैन ने कहा कि अधूरी पड़ी परियोजनाएं पूरी करने के लिए राज्य सरकार का सहयोग जरूरी है। सरकार जमीन व पैसा दे, ताे इस साल छह में से तीन परियोजनाएं परी कर दी जाएंगी। अब सब सरकार पर निर्भर है।
टोरी लाइन अधूरी

अरुणेंद्र ने कहा- रांची-लोहरदगा टोरी लाइन का काम जमीन अधिग्रहण के कारण अटकी हुई है। जमीन के छोटे-छोटे 200 से 250 मीटर के टुकड़ा मिलते हैं, जिस पर नालों व नदियों पर पुल का काम चल रहा है।