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रांची लाई गई ट्रैफिकिंग की शिकार 26 नाबालिग, NGO के मदद से कराया मुक्त

7 वर्ष पहले
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रांची. ट्रैफिकिंग की शिकार झारखंड की 26 नाबालिग लड़कियों को दिल्ली से गरीब रथ एक्सप्रेस से रांची लाया गया। भारतीय किसान संघ, दिल्ली पुलिस, झारखंड भवन दिल्ली, बाल कल्याण समिति और सेव द चिल्ड्रेन नामर संस्था के सहयोग से 26 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। मुक्त कराए गईं बच्चियां गुमला, सिमडेगा, बोकारो, पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, साहिबगंज, लोहरदगा, सरायकेला, गढ़वा और रांची की हैं। बाल श्रम से मुक्त कराई गईं चार लड़कियों को तीन लाख रुपए क्षतिपूर्ति राशि के रूप में नियोजक से दिलाए गए और नियोजकों पर प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई। भारतीय किसान संघ के निदेशक सह सदस्य झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षक आयोग दिल्ली में एक सप्ताह से कैंप किए हुए थे।
परिवार को नहीं दी सूचना
ट्रैफिकिंग की शिकार बोकारो की एक नाबालिग लड़की ने दिल्ली की एक संस्था पर आराेप लगाया है कि 15 दिन पहले उस संस्था में एक लड़की ने फांसी लगाकर जान दे दी। शव को संस्था कार्यालय के पीछे दफन कर दिया, लेकिन उसके परिजनों को जानकारी नहीं दी गई। नाबालिग ने बताया कि घर में झगड़ा हाेने के कारण दिल्ली चली गई थी। वहां दिल्ली पुलिस ने पकड़ कर मुझे उससंस्था में डाल दिया था।
मां-पिता पर दर्ज होगा केस
बताया गया कि सभी बच्चियां दिल्ली में पिछले दो से पांच साल से काम कर रही थीं। सभी की उम्र 14 से 16 साल की है। आयोग सभी बच्चियों को एक सप्ताह अपने पास रखेगा। उसकी मानसिक स्थिति के बारे में जानकारी लेगा। इस दौरान उनकी काउंसिलिंग भी की जाएगी। जो बच्ची प्रशिक्षण लेना चाहती है, उसे प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। साथ ही पढाई के लिए कस्तूरबा गांधी स्कूल में उनका नामांकन भी कराया जाएगा।
सरकार की इच्छाशक्ति में कमी
आयोग के सदस्य संजय मिश्रा ने कहा कि आयोग हमेशा सरकार को डायरेक्शन देती है, पर सरकार उस पर काम नहीं करती है। सरकार के उदासीन रवैये के कारण ट्रैफिकिंग पर रोक नहीं लग पा रही है। यहां पर सबको मिलकर इंट्रीगेटेड सेक्युरिटी सिस्टम के तहत काम करने की जरूरत है। आयोग की तरफ से काफी कोशिश की गई, लेकिन सरकार इस मामले में कुछ नहीं कर रही है। झारखंड में ट्रैफिकिंग की समस्या सबसे ज्यादा है।
मां-बाप ने जबरन शादी करा दी थी : एक नाबालिग ने बताया कि मां-बाप ने जबरन शादी करा दी थी। उसके बाद दीदी और जीजा के साथ पंजाब चली गई। वहां से भाग कर दिल्ली पहुंच गई।