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डाउनलोड करेंरांची.हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद राजधानी में लगाए गए बड़े--बड़े होर्डिंग्स और उस पर लिखे गए स्लोगन झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए सरदर्द बन गए हैं। होर्डिंग्स पर लिखा गया है, युवाओं की बढ़ेगी भागीदारी, अब होगी विकास की तैयारी...।
इस स्लोगन का अर्थ झामुमो ने चाहे जो भी लगाया है, लेकिन पार्टी विधायकों ने इसका मतलब यह लगाया है कि मंत्रिमंडल में युवा विधायकों को तरजीह मिलेगी। यह मतलब समझ में आते ही पार्टी के चार युवा विधायक मंत्री बनने की जुगत में लग गए हैं। जय प्रकाश भाई पटेल भले ही अभी मुखर नहीं हुए हैं, लेकिन अकील अख्तर, जगन्नाथ महतो, पौलुस सुरीन और दीपक बिरुआ के लिए लॉबिंग तेज हो गई है।
पौलुस ने तो कई मर्तबा आंखें तरेरते हुए कहा भी है कि दक्षिणी छोटानागपुर के साथ भेदभाव बंद होना चाहिए। जगन्नाथ महतो को शांत करने के उद्देश्य से पार्टी ने फिलहाल उन्हें सचेतक का पद दे दिया है। लेकिन दीपक बिरुआ कोल्हान में लंबी और समानांतर लकीर खींचने के मूड में हैं।
अकील के पक्ष में पार्टी का एक बड़ा धड़ा उठ खड़ा हुआ है, जो येन केन प्रकारेण उन्हें मंत्री की कुर्सी पर देखना चाहता है। ये नेता संथाल में अकील के बढ़े प्रभाव का इस्तेमाल पार्टी के हित में करने की दलील दे रहे हैं।
सोशल इंजीनियरिंग पर है जोर
पार्टी के रणनीतिकारों ने सोशल इंजीनियरिंग पर जोर दिया है। ऐसे में कई लोगों ने युवा नेतृत्व को आगे करने और उन्हें महत्वपूर्ण दायित्व सौंपने की वकालत की है। इनका कहना है कि मांझी, मुसलमान और महतो वोट के आधार पर राजनीति करनेवाले झामुमो की बागडोर जब हेमंत सोरेन ने थाम ली है तो मुसलमान और महतो समाज के भी युवा विधायकों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इनका कहना है कि ऐसा होने से पार्टी की दूरदर्शिता सामने आएगी।
इलेक्शन मैनेजमेंट की तैयारी शुरू
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों को इलेक्शन मैनेजमेंट में लगाने की तैयारी हो रही है। पूर्व में मंत्री रहे विधायकों को बड़ी जवाबदेही दी जा सकती है। ऐसा हुआ तो फिर कुछ युवा विधायकों के लिए मंत्री बनने की राह आसन हो सकती है।
ये हैं युवा विधायक : अकील अख्तर, जगन्नाथ महतो, दीपक बिरुआ, पौलुस सुरीन और जय प्रकाश भाई पटेल।
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