जामा। जामा में एक भी कल-कारखाना नहीं। लघु उद्योगों के लिए भी जन प्रतिनिधियों ने कभी कोई कोशिश नहीं की। घर का चूल्हा जलाने के लिए खेती ही एकमात्र सहारा है, लेकिन खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पाया है। गांवों की सड़कें अत्यंत जर्जर हैं। विधायक पर लगा धब्बा भी इलाके का मुद्दा है। वोटर कहते हैं कि संथाल के लोग आमतौर पर सीधे-साधे और नेताओं पर विश्वास करने वाले होते हैं। बदनामी उन्हें नहीं सुहाती। अब तक जितने भी विधायक चुने गए उन्होंने जामा की तरक्की के लिए कारगर प्रयास नहीं किया। इसीलिए इस विधानसभा क्षेत्र के गुस्साए लोग कहते हैं कि विकास नहीं तो मत मांगो 'मत'। आखिर हमारा वोट बर्बाद क्यों हो। जामा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के सुरेश मुर्मू और झामुमो की सीटिंग विधायक सीता सोरेन के बीच सीधे मुकाबले की तस्वीर बन रही है। वैसे झाविमो के सुखलाल सोरेन चुनावी जंग को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं।
खेल बिगाड़ सकते हैं कांग्रेस के मार्शल
कांग्रेस प्रत्याशी मार्शल मरांडी खेल बिगाड़ सकते हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में ईसाई समुदाय का वोट काफी अधिक है। इन्हें अपने पक्ष में करने में कांग्रेस सफल रही, तो कई प्रत्याशियों का समीकरण गड़बड़ा सकता है।
जातीय समीकरण
संथाल आदिवासी 40%
मिशनरी 20%
पिछड़ी जाति 35%
सामान्य जाति 04%
अल्पसंख्यक 01%