रांची. राजनीति का चक्रव्यूह रचने वाले कूटनीतिज्ञ। लोगों को चुनावी दर्शन और वोट की कीमत बताने-पढ़ाने वाले दार्शनिक किस्म के लोग। शासन तंत्र की चालक ताकत नौकरशाही का शीर्ष। और जिंदगी के हर पहलू में सहूलियत खोजने वाले शहरी मध्य वर्ग के साथ-साथ आम आदमी की लोकतंत्र में सहभागिता की मंगलवार को एक साथ परख होगी। परख कथनी-करनी की भी होगी। कथनी का मतलब वोट की महत्ता समझाने वाले तमाम प्रयासों से है और करनी का तात्पर्य बूथों तक पहुंचने से है। मंगलवार को दर्ज होगा कि रांची की पेटी में समाए विधानसभा क्षेत्रों में लोकतंत्र का महापर्व वाकई उत्सव में तब्दील होता दिखेगा या फिर एकदिनी अवकाश में! संशय, इसलिए कि पिछला रिकार्ड दुरुस्त नहीं है। रांची, हटिया, कांके न्यूनतम वोट प्रतिशत वाले क्षेत्र रहे हैं और सबसे कम महिलाओं ने इन्हीं तीनों विधानसभा क्षेत्रों में वोट दिया था। उम्मीद, इसलिए कि दूसरे चरण में जब जमशेदपुर के शहरी वोटर अपना रिकार्ड सुधार सकते हैं, तो रांची के लोग भी पीछे नहीं रहेंगे।
17 प्रत्याशियों के बीच से वोटर चुनेंगे अपना नेता
फैसले की घड़ी आ गई है। रांची के तीन लाख से अधिक वोटर मतदान के लिए तैयार हैं। वे मंगलवार को अपना फैसला सुना देंगे। राजधानी की हॉट सीट पर कब्जा करने के लिए यूं तो 17 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन वोटरों की पहली पसंद कौन बनेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। यहां मुख्य मुकाबला भाजपा के सीपी सिंह, झामुमो की डॉ. महुआ माजी, कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह और झाविमो के राजीव रंजन मिश्र के बीच होने की संभावना जताई जा रही है। अन्य प्रत्याशी भी वोटरों को अपने पक्ष में करने की जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं। रांची के वोटरों को लुभाने के लिए राजनीतिक दलों ने डिजिटल प्रचार वाहन से लेकर नुक्कड़ सभाएं की। बड़े नेताओं की ताबड़तोड़ सभाएं हुईं। सबकी बातें सुनने के बाद वोटर भी मन बना चुके हैं कि किसे वोट देना है।
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