रांची. जय हो। वोटर की। उनके मिजाज की। लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था की। मौसम की रुसवाई भी उन्हें डिगा नहीं पाई जो तर्जनी पर तिलक लगाने को तरजीह देते हैं। बूंदा-बांदी और बदली के बीच चौथे चरण में लोग घरों में दुबके नहीं। निकले। वोट डालने। राज्य के दक्षिण-पश्चिमी इलाके से शुरू हुई वोट यात्रा अपने चौथे चरण में रविवार को कोयलांचल के इलाके में थी। यहां वही उत्साह दिखा जो लोगों ने लोकसभा में दिखाया था। कमोबेश इस चरण की पंद्रह विधानसभा सीटों पर उतना ही वोट पड़ा जितना लोकसभा चुनाव के दौरान पड़ा था। हां, पहले के तीन चरणों की तरह इस चरण में भी जो एक बात आम दिखी वह थी शहरी वोटरों की चाल। यह तबका, गंवई गरीबों की तुलना में इस बार भी सुस्त रहा। इस चरण में भी नए वोटरों के बीच मजे का उत्साह दिखा। कुल मिलाकर कहें तो फैसला जो भी हो, तय गांव और नए वोटरों की जमात ही करेगी। गांव का किसानी मिजाज मौसम से जूझने का आदी होता है तो जवानी का जोश, मौसम जैसा भी हो उससे टकराता है। चौथे चरण के मतदान ने इसे पुष्ट किया। लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी समेत विधानसभा की सीढि़यां चढ़ने को इच्छुक चेहरों पर अपना ठप्पा लगा दिया है। ठप्पा किस व्यक्तित्व पर ठीक से लगा, पता आज से ठीक आठ दिन बाद चलेगा। उस दिन (23 दिसंबर) परिणाम आएंगे।
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