रांची. झारखंड हाईकोर्ट में वकीलों के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है। अभी लगभग आठ सौ अधिवक्ता ऐसे हैं, जिनके पास बैठने का तय स्थान नहीं है। वे कभी सीनियर के साथ या अन्य प्रकार से कोर्ट में बैठते हैं और अपना काम करते हैं। लेकिन ताजा खबर है कि इस समस्या का निदान अब जल्द ही हो सकता है। हाईकोर्ट परिसर में एक नई बिल्डिंग बनने वाली है। यह भवन तीन मंजिला होगा। इसी भवन के एक तल्ले पर अधिवक्ताओं को बैठने की जगह दी जाएगी।
हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन से परिसर स्थित बैंक तक बने पुराने भवनों के स्थान पर नए भवन का निर्माण करने का आदेश भवन निर्माण विभाग को दिया गया है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। भवन निर्माण के लिए निविदा फाइनल हो गई है, जल्द ही काम शुरू होने की उम्मीद है।
टेंडर हुआ, काम शुरू होने का इंतजार
इस संबंध में एडवोकेट एसोसिएशन कोर्ट प्रशासन के समक्ष कई बार अपनी बातें रख चुका है। वहीं तीन मंजिले भवन के निर्माण की मांग दो वर्ष पहले से ही की जा रही है। बाद में भवन बनाने का निर्णय लिया गया पर निविदा टलती रही, फिर टेंडर हुआ पर काम शुरू नहीं हुआ। जानकारी के अनुसार अब कोर्ट प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है और सरकार को समय सीमा के भीतर काम करने को कहा है।
न्यायिक आदेश की हो रही है अवहेलना
बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष प्रेमचंद त्रिपाठी का मानना है कि अधिवक्ताओं के बैठने की व्यवस्था का नहीं होना एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। चतरा, गुमला, पोड़ाहाट समेत अन्य जिलों में जहां सिविल कोर्ट बन रहे हैं वहां न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं के लिए समुचित व्यवस्था की जा रही है। इन मामलों में हाईकोर्ट के भी आदेश हैं। पर सरकार न्यायिक आदेशों की भी अवहेलना कर रही है।