रांची. राज्य के 59 विधायकों पर दर्ज आपराधिक मामलों की जांच के संबंध में दायर जनहित याचिका का निष्पादन झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को कर दिया। इस मामले में सरकार का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने लंबित जांचों को तीन माह में पूरा करने का आदेश देते हुए मामले का निष्पादन किया।
इस संबंध में झारखंड अगेंस्ट करप्शन की ओर से एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए राज्य के आरोपी विधायकों व एक सांसद के विरुद्ध जांच जल्द करने और इस संबंध में फाइनल रिपोर्ट सौंपने का आदेश पारित करने का आग्रह किया गया था।
जस्टिस आरआर प्रसाद की खंडपीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई की। सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने बताया कि अधिकांश मामलों में जांच पूरी हो गई है। कुछ गिने-चुने मामलों में जांच चल रही है। जल्द ही इनमें चार्जशीट सौंप दी जाएगी। कुछ अन्य ऐसे मामले हैं, जिनके संबंध में अन्य वाद भी चल रहे हैं। सरकार का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने मामले को निष्पादित कर दिया।
मेडिकल नामांकन पर मांगा जवाब
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के मेडिकल काॅलेजों में एसटी-एससी और ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया के संबंध में सरकार को जानकारी देने का आदेश दिया है। जस्टिस आरआर प्रसाद की खंडपीठ ने प्रेम कटारुका द्वारा दायर एक हस्तक्षेप याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2002 में राज्य सरकार ने एक आदेश जारी किया था। इसके तहत मेडिकल काॅलेजों में आरक्षित सीटों के इस वर्ग के छात्रों द्वारा नहीं भरने की स्थिति में मेरिट के आधार पर इसे अन्य श्रेणी के छात्रों से भरने की व्यवस्था थी। अब इसे बदल दिया गया है। इससे ये सीटें आरक्षित वर्ग के छात्र के नहीं मिलने पर खाली रह जा रही हैं, इसलिए सरकार को इसे भरने का आदेश दिया जाए।
चुनाव बाद रेंजरों का करें पदस्थापन
जनवरी 2014 में ही फॉरेस्टर से रेंजर के पद पर प्रोन्नत अधिकारियों को चुनाव के बाद पदस्थापित करने का आदेश झारखंड हाईकोर्ट ने दिया है। जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने सोमवार को राकेश सिंह और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया कि सरकार ने भले ही पदस्थापना का फैसला ले लिया हो, पर चुनाव के बाद ही इसे प्रभावी किया जा सकता है। इसके पहले ऐसा करने के लिए चुनाव आयोग की अनुमति जरूरी है। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग का पक्ष राज्य के पूर्व मुख्य सचिव व अधिवक्ता डाॅ. एके सिंह ने रखी। उन्होंने कहा कि अभी राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू है, ऐसे में चुनाव आयोग की सहमति के बिना अफसरों के पदस्थापना के निर्णय को प्रभावी नहीं बनाया जा सकता।
एचईसी ने जेएससीए पर लगाया करार के उल्लंघन का आरोप
एचईसी ने झारखंड स्टेट क्रिकेट एसो. के धुर्वा स्थित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम व स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के लिए हुए लीज करार के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। यह आरोप राकेश कुमार द्वारा जेएससीए स्टेडियम की जमीन के व्यावसायिक उपयोग को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई में अपना पक्ष रखते हुए एचईसी ने लगाया। कोर्ट को बताया कि जेएससीए को 15.85 करोड़ रुपए में 31.70 एकड़ भूमि लीज पर दी थी। जमीन का उपयोग क्रिकेट और स्पोर्ट्स के लिए किया जाना था। इसके दूसरे व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं दी थी। यह भी बताया कि 25 जून 2008 को हुए लीज करार के मुताबिक जेएससीए को एचईसी को पांच प्रतिशत गेट मनी देना था। इसके अलावा उसे मैच के 100 टिकट भी दिए जाने थे, परंतु टिकट नहीं दिया जाता है। स्टेडियम में कहीं भी एचईसी का लोगो भी नहीं लगाया गया है। सुनवाई के दौरान प्रार्थी द्वारा अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगे जाने के अनुरोध को जस्टिस आरआर प्रसाद की खंडपीठ ने स्वीकार करते हुए सुनवाई की अगली तिथि 13 जनवरी निर्धारित की।