गिरिडीह/पारसनाथ. पूरी दुनिया में अहिंसा परमोधर्म: का संदेश फैलाने वाले जैन धर्मावलंबियों के तीर्थक्षेत्र पारसनाथ पहाड़ और आसपास के इलाकों को नक्सलियों ने पिछले एक हफ्ते से थर्रा दिया है। तुईयो में 21 जनवरी की रात पंचायत भवन को विस्फोटक लगाकर ध्वस्त कर देने के बाद भी नक्सलियों ने अपना आतंकी अभियान यहां जारी रखा। 25 जनवरी को नक्सलियों ने तुईयो पंचायत से सटे नोकनिया गांव से एक रिसर्च फैलो समेत चार कर्मचारियों का अगवा कर पूरे प्रशासन का ही अगवा कर लेने का लोगों को संदेश दिया।
माओवादियों का आतंकी अभियान यहीं नहीं थमा और अपहृतों की तलाश में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में शामिल जवानों में एक की सीरियल ब्लास्ट से जान ले ली तो दर्जनाधिक जवानों को घायल कर दिया। हालांकि इस वारदात से पहले कोई ढाई सालों तक इस पूरे इलाके में शांति रही। दरअसल, यहां माओवादियों के लगाए लगे माओवाद जिंदाबाद और लाल सलाम की गर्जना के बीच अहिंसा परमोधर्म: का मंत्र भी कांपता रहा है।
2008 में पुलिस को मिली थी बड़ी कामयाबी 31 दिसंबर 2008 को पुलिस के होश तब फाख्ता हो गए थे, जब छापेमारी के दौरान इस पहाड़ पर माओवादियों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारी चल रही थी। इस दिन तत्कालीन पुलिस कप्तान मुरारीलाल मीणा की अगुवाई में सुरक्षा बलों ने छापामारी शुरू की थी। छापामारी में नक्सलियों को पीछे हटना पड़ा था।
पुलिस जब पहाड़ की एक चोटी पर पहुंची, तो देखा कि यहां एक हजार लोगों के आराम से बैठने का इंतजाम किया गया है। साथ ही यहां कोरियन कंबल और ड्राइ फ्रूट्स भी बरामद किए गए थे। इस छापेमारी में पुलिस को मोआवादियों के इस इलाके में मजबूत पकड़ की जमीनी हकीकत का पता चला था। तब पुलिस बल और माओवादियों के बीच घंटों मुठभेड़ हुई। इसमें पुलिस को भारी पड़ते देख माओवादी पीछे हट गए थे। पुलिस ने ट्रेनिंग कैंप से 50 क्विंटल चावल, दो क्विंटल लहसुन, खाना बनाने का बर्तन आदि बरामद किया था। दूसरा बड़ा अभियान 2008 के आठ फरवरी को चला। इसमें पुलिस ने एक माओवादी लड़ाके को मार गिराया था। जबकि सीआरपीएफ के एक जवान शहीद हुए थे। पहाड़ के करमाटोंगरी गांव के समीप एक अन्य मुठभेड़ में पचंबा होमगार्ड कैंप से लूटी गई राइफल व गोली बरामद हुई थी।
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