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रॉकेट लॉन्चर जैसे कई हाईटेक हथियारों से नक्सली लैस, पुलिस कंफ्यूज्ड

7 वर्ष पहले
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रांची. झारखंड में नक्सली लगातार खुद को मजबूत कर रहे हैं। हाईटेक हथियारों से लैस हो रहे हैं। झारखंड पुलिस लगातार हथियारों की बरामदगी से कंफ्यूज्ड है। कन्फ्यूजन की वजह है नक्सलियों तक विदेशी हथियारों का पहुंचना। नक्सली विदेशी हथियार की खरीदारी पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं। वे चेकेस्लोवाकिया, इटली व चीन में बने हथियार मंगा रहे हैं। पिछले दिनों झारखंड पुलिस की सूचना पर पटना पुलिस ने कंकड़बाग से एके 56 बरामद किया था, जो चेकोस्लोवाकिया में बना था। हजारीबाग से मिले पिस्टल और बुलेटप्रुफ जैकेट इटली निर्मित हैं। कई उग्रवादी एनकाउंटर में बरामद हुए हथियार चीन में बने हुए थे। नक्सलियों के पास से जाली भारतीय करेंसी की बड़ी खेप भी पकड़ में आई है।
राज्य की राजधानी में रॉकेट लॉन्चर पहुंचाने वाले गिरोह के सरगना की तलाश एनआईए की विशेष टीम कर रही है। कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं। आठ मामलों में एनआईए जानकारियां एकत्र कर रही है। झारखंड सरकार ने सूबे के रांची, लोहरदगा, लातेहार और हजारीबाग में भारी पैमाने पर हुए हथियार और गोला बारूद की बरामदगी का मामला एनआईए को सौंपा था। सरकार ने जांच से संबंधित पत्र एनआईए को भेजा था। इसके बाद एनआईए ने अपनी जांच शुरू कर दी। सभी मामलों की विस्तृत जांच रिपोर्ट और जानकारियां टीम एकत्र कर रही है। रैकेट के चार प्रमुख लोगों के नाम सामने आए हैं।
जिनके तार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े होने की संभावना है। इतने बड़े पैमाने पर एसएलआर, इनसास और एके 47 की गोलियां और बड़े हथियारों की बरामदगी से जांच एजेंसियों के आला अधिकारी भी हैरान हैं। जांच से जुड़े अफसरों के अनुसार ऑर्डिनेंस फैक्ट्री, पुलिस, पारा मिलिट्री फोर्स, सेना आदि के गोदाम से गायब गोला बारूद नक्सलियों तक पहुंच रहे हंै। गोला बारूद की सप्लाई में बड़ा रैकेट काम कर रहा है। हथियारों के रैकेट में शामिल सरगना बिहार के रास्ते अपना कारोबार फैला रहा है।
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