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हाल चतरा सदर अस्पताल का : जमीन पर हो रहा महिलाओं का ईलाज, बेड तक नहीं

7 वर्ष पहले
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चतरा। परिवार नियोजन अभियान का रूप ले चुका है, लेकिन सिस्टम की विसंगतियां इसे दागदार बना रही हैं। मामला चतरा सदर अस्पताल का है। यहां हर मंगलवार और शुक्रवार को दर्जनों महिलाएं बंध्याकरण ऑपरेशन के लिए पहुंचती हैं। कड़कड़ाती ठंड में अस्पताल की संसाधनविहीन व्यवस्थाओं के बीच घंटों इंतजार और ऑपरेशन के बाद बेड की जगह जमीन पर लिटा देना महिलाओं के लिए त्रासदी से कम नहीं है।

दैनिक भास्कर की टीम शुक्रवार की रात लगभग 9.15 बजे इन महिलाओं का हाल जानने सदर अस्पताल पहुंची तो वहां के हालात देखकर दहल उठी। अस्पताल में चारों ओर घुप अंधेरा छाया था। टॉर्च की रोशनी में दिखा कि कुछ महिलाएं अस्पताल के बरामदे में बैठी हैं। पूछने पर उन्होंने बताया कि वे बंध्याकरण के लिए आई हैं। देर रात उनका ऑपरेशन किया जाना है। इस जानकारी के बाद टीम ने दो घंटे से अधिक समय तक पूरे मामले की पड़ताल की। इस दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। शुक्रवार को बंध्याकरण के लिए पहुंचीं 70 महिलाओं में से 46 का ही ऑपरेशन हो पाया। इसके अलावा दो एनएसबी (पुरुष नसबंदी) भी हुई।
न कुर्सी-टेबल, न बेड और न ही कंबल

ठंड के इस मौसम में महिलाओं के बैठने के लिए न तो कुर्सी-टेबल हैं, न ही ऑपरेशन के बाद उनके लिए बेड की व्यवस्था हैं। महिलाएं अस्पताल के बरामदे में ठिठुरते हुए बैठकर अपनी बारी का इंतजार करती हैं। अॉपरेशन के बाद उनका हाल और भी बुरा होता है। उन्हें अस्पताल के हॉल में ऐसे ही जमीन पर लिटाकर छोड़ दिया जाता है। उन्हें न बेड दिया जाता है और न ही बेडशीट। कंबल की तो बात ही छोड़ दीजिए। घर से लाए गए ओढ़ना और बिछावन से ही वे काम चलाती हैं।
सुबह से लाइन, पूरी रात होता है आॅपरेशन

सदर अस्पताल में हर मंगलवार और शुक्रवार को बंध्याकरण ऑपरेशन होता है। पूरे जिले से कभी 75-80 तो कभी 100 से भी अधिक महिलाएं पहुंचती हैं। सुबह 11 बजे से लाइन लगनी शुरू होती है। ऑपरेशन कब होगा, यह डॉक्टर के उपलब्ध होने पर निर्भर है। छोटे से कमरे वाले आॅपरेशन थियेटर में बारी-बारी कर ऑपरेशन किया जाता है। ऑपरेशन पूरी रात जारी रहता है।
सिर्फ ओटी में रोशनी

अस्पताल में रोशनी के लिए जेनरेटर की व्यवस्था है, लेकिन डीजल बचाने के लिए सिर्फ ओटी में बिजली की सप्लाई की जाती है। चारों ओर अंधेरा रहता है। महिलाएं अंधेरे में ओटी के बाहर इंतजार करती रहती हैं।
महिला डॉक्टर नहीं

पूरे जिले में एक भी सरकारी महिला डॉक्टर नहीं है। पुरुष डॉक्टर और दो-तीन एएनएम की टीम ही बंध्याकरण ऑपरेशन करती है। वर्षों से महिला डॉक्टर की मांग पर स्वास्थ्य विभाग ध्यान नहीं दे रहा है।
जो संसाधन हैं, दिए जा रहे

'जो संसाधन उपलब्ध हैं, महिलाआें को दिए जा रहे हैं। जगह के साथ बेड की भी कमी है। बेड के हिसाब से ऑपरेशन हों, तो एक दिन में चार-पांच ऑपरेशन ही होंगे।' -डॉ. एसपी सिंह, सिविल सर्जन