रांची. राज्य अलग हुए 14 वर्षों के बाद भी रांची को राजधानी का स्वरूप नहीं दिया जा सका है। जब राजधानी की ऐसी स्थिति है तो राज्य के दूसरे शहरों की स्थिति को समझा जा सकता है। जनप्रतिनिधियों के उपर जनता होती है जनता को एक- एक सवाल का जबाव देना होता है, लेकिन अधिकारियों को इससे मतलब नहीं।
अधिकारियों तक आम जनता की पहुंच भी नहीं होती है। इसके बाद भी अधिकारी काम करना ही नहीं चाहते। जब अधिकारी काम नहीं करेंगे तो उन्हें सरकार से वेतन लेने का भी अधिकार नहीं है।
राज्य सरकार शीघ्र ही ऐसा कानून बनाने जा रही है जिसमें काम नहीं करने वाले पदाधिकारियों को चिन्हित कर उन पर कार्रवाई की जा सके। उक्त बातें नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने गुरुवार को एटीआई सभागार में आयोजित वर्कशॉप में कही। इस वर्कशॉप का आयोजन एसोचैम, नगर विकास विभाग और आवास विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। इसमें नगर विकास सचिव अजय कुमार सिंह, निदेशक प्रमाद कुमार गुप्ता, संयुक्त सचिव विजय कुमार सिंह सहित सभी नगर निकाय के पदाधिकारी उपस्थित थे।