रांची. सीएनटी एक्ट में संशोधन का फायदा नेताओं, अफसरों , ठेकेदारों व अन्य बडे़ लोगों को मिलेगा। शनिवार को टीएसी की बैठक में सदस्यों ने एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव पर सहमति देकर इस पुरानी मांग को नई दिशा दी है। वैसे पूर्व में कई प्रभावशाली लोगों ने इस एक्ट का दुरुपयोग भी किया है। कई बार शिकायत मिलने पर इसकी जांच भी कराई गई है।
इन लोगों ने पहले किया है सीएनटी एक्ट का उल्लंघन
नाम पिता
प्रदीप कुमार बलमुचू अगुस्टीन बलमुचू
सिंदरेला बलमुचू प्रदीप कुमार बलमुचू
रूपी सोरेन सुदु मांझी
कल्पना मुर्मू अंपा मुर्मू
स्टीफन मरांडी स्व. पतरस मरांडी
हेमलाल मुर्मू पटवारी मुर्मू
सुजाता सुंब्राई बागुन सुंब्राई
मधु कोड़ा रसिका हो
नियेल तिर्की प्रेमचंद्र तिर्की
मेनन एक्का एनोस एक्का (पति)
शीला किस्कू रपाज सेत सनातन रपाज
सरोज सिंकू विनय कुमार सिंकू (पति)
राजदीप संजय जॉन स्व. एचइ जॉन
डॉ. शीतल मलुआ स्व. गोविंद मलुआ
सुधीर लकड़ा बेंजामिन लकड़
सौरव तिर्की पोलीकार्प तिर्की
अभी क्या है सीएनटी एक्ट में प्रावधान
वर्ष 1908 में बने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की की धारा 46 के 1 (बी) (ए) में अनुसूचित जनजाति की जमीन के लिए विशेष प्रावधान है। इसमें कहा गया है कि अनुसूचित जनजाति सदस्य उसी थाना क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति से ही जमीन खरीद बिक्री कर सकते हैं। छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 46 में ही यह भी प्रावधान है कि अनुसूचित जाति व पिछड़ी जाति के सदस्य उसी जिला के स्वजातीय से ही जमीन खरीद बिक्री कर सकते हैं। दूसरे द्वारा न तो ये जमीन खरीदी जा सकती है और न ही उसे बेची जा सकती है।
सरकार ने माना था कि हो रहा है सीएनटी एक्ट का उल्लंघन
फरवरी 2012 में सरकार ने माना था कि वीआईपी ने सीएनटी का उल्लंघन कर रहे हैं। राज्य सरकार ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) का उल्लंघन कर जमीन की खरीद बिक्री करने के मामले में रांची उपायुक्त से रिपोर्ट मांगी थी। राज्य सरकार ने स्वीकार किया था कि एक ही थाना क्षेत्र के निवासी नहीं होने के बाद भी सीएनटी एक्ट के विपरीत आदिवासियों की जमीन खरीदी गई है। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने रांची में सीएनटी एक्ट के प्रावधानों के विरुद्ध जमीन खरीदने की अनुमति देने वालों अधिकारियों के मामले में स्वयं सवाल खड़ा किया था।
2012 में अर्जुन मुंडा ने एक्ट के उल्लंघन पर बनाई थी कमेटी
वर्ष 2012 में सीएनटी बचाओ मोर्चा की मांग पर सीएनटी एक्ट से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर टीएसी के सदस्यों को अध्ययन करने का समय दिया गया था। बैठक में आदिवासियों के जमीन का अवैध हस्तांतरण और सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर राज्य में हुई जमीन खरीद बिक्री का मामला उठने के बाद तत्कालीन टीएसी अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने इस मामले को साइमन मरांडी की अध्यक्षता में बनी उप समिति को रेफर कर दिया था। अादिवासी जमीन का अवैध हस्तांतरण पर रोक लगाने एवं इस समुदाय के छात्र छात्राओं को बैंक से शिक्षा ऋण कैसे मिले इस पर विचार करने के लिए साइमन मरांडी की अध्यक्षता में टीएसी की एक उप समिति बनी हुई थी।
आम आदिवासियों को फायदा कम, कृषि जमीन पर बढ़ेगा दबाव
सीएमटी एक्ट की धारा 46 के उपखंड टू के तहत प्रावधानों में किए जा रहे संशोधन की अनुशंसा को विशेषज्ञ वकील पांडेय आरएन राय ने व्यक्तिगत हित बताया है। आज के दौर में सभी बैरियर टूट रहे हैं। सीएनटी एक्ट की धारा 46,48,71 ए और 242 में संशोधन की आवश्यकता है। 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया, जबकि छत्तीसगढ़, केरल समेत कुछ शहरों में टीएनएसी एक्ट पर आवश्यकतानुसार प्रारंभिक दौर में आवश्यक संशोधन कर लिए गए। सभी राज्य आज विकास की दौड़ में आ गए हैं। इसके लागू हो जाने से धनाढ्य आदिवासी समुदाय और भी धनाढ्य होते चले जाएंगे। जबकि, भरपूर कृषक जमीन वाले आदिवासी किसान दिनों दिन गरीब होते चले जाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि योग्य जमीन सक्षम आदिवासी के हाथ में चली जाएगी। कृषि योग्य जमीन नहीं रह जाएगी। मौजूदा दौर में कृषि योग्य जमीन को अहस्तांतरणीय कर देना चाहिए। इसका फायदा काफी दूर का होगा, क्योंकि कृषि योग्य जमीन रहने पर ही राज्य और देश का विकास संभव है। भू व्यवस्था पर वर्तमान अनुशंसा जनता की आखों में धूल झोंकने के समान है। संशोधन में विलंब की वजह से इस राज्य में भूमि से जुड़े मुकदमों की संख्या में वृद्धि हो रही है। मसलन, अंचल से रसीद प्राप्त करने के लिए हाईकोर्ट में अबतक 572 रिट याचिका दाखिल हो चुकी है। 1980 से पहले ऐसी अराजक स्थिति नहीं थी। भू व्यवस्था से संबंधित कई समस्याएं हैं।
वकील पांडेय आरएन राय