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स्टाइपेंड का मामला: ऑनलाइन प्रोसेस में सेंध लगा कर हो रही है लूट

7 वर्ष पहले
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रांची. फ्री में एमबीए कराने के नाम पर सरकारी स्टाइपेंड की लूट हो रही है। राज्य के बाहर के शैक्षणिक संस्थान यहां के स्टूडेंट्स को ठग रहे हैं। बगैर एडमिशन ही छात्रों के नाम पर स्टाइपेंड निकाले जा रहे हैं। इस खेल में दिल्ली का एक कॉलेज पूरी तरह सक्रिय है। नाम है एरि सोल्वर स्कूल ऑफ बिजनेस। इस कॉलेज ने बिना एडमिशन के ही 13 छात्रों से करीब सात लाख रुपए ठग लिए हैं। राजधानी समेत राज्य के अन्य जिलों के स्टूडेंट्स के दस्तावेज लेकर उनके नाम से ऑनलाइन आवेदन भरकर स्टाइपेंड निकाल रहे हैं। यह खुलासा रांची की छात्रा मोनी कुमारी ने किया है।

मोनी ने कॉलेज के स्टॉफ का विजिटिंग कार्ड और मोबाइल नंबर भी दिया है। साथ ही स्टूडेंट्स से भरवाए जाने वाले आवेदन का प्रारूप भी सौंपा। मोनी ने लिखित रूप से इसकी जानकारी जिला कल्याण पदाधिकारी नीरज कुमारी को दी है। अबतक हुई जांच के बाद नीरज कुमारी ने इस मामले की रिपोर्ट कल्याण विभाग के सचिव सुनील वर्णवाल को भेज दी है। इसमें मोनी कुमारी और उसकी दो बहनों को स्टाइपेंड देने पर पुनर्विचार करने समेत पूरे मामले की जांच करने का आग्रह किया गया है। मालूम हो कि दैनिक भास्कर ने फर्जी एडमिशन के नाम पर स्टाइपेंड घोटाला... शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद हुई जांच में इसकी पुष्टि हुई है। इसके बाद जिला कल्याण शाखा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मोनी को नोटिस भेजकर पूछताछ की।
स्टूडेंट्स इनफार्मेशन फॉर्म के नाम पर झांसा
इनफार्मेशन फार्म देकर कॉलेज स्टूडेंट्स को झांसे में लेता है। इसमें स्टूडेंट्स के एड्रेस के साथ पूरा डिटेल मांगा जाता है। साथ में शैक्षणिक प्रमाण पत्र समेत जाति, आय, बैंक डिटेल, आधार कार्ड, आधार नंबर, बैंक का आईएफसी कोड, फोटो पहले ही मांग लिया जाता है। इसके बाद कॉलेज की ओर से उनके नाम से स्टाइपेंड के लिए ऑनलाइन आवेदन भरा जाता है। इससे कल्याण विभाग को कॉलेज का बोनाफाइड भी प्राप्त हो जाता है और स्टाइपेंड जारी कर दिया जाता है।
मोनी ने भी स्टाइपेंड के लिए दिया फर्जी दस्तावेज
जांच में पता चला है कि मोनी कुमारी के पिता घाटो में टाटा कोलियरी में काम करते हैं। उनका वेतन 30 हजार रुपए प्रति माह है। इसके बावजूद मोनी ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से अपना और दोनों बहनों का फर्जी इनकम सर्टिफिकेट बनवा कर स्टाइपेंड के लिए कॉलेज में जमा कराया था। इसके बाद तथ्यों को छुपाकर फर्जी तरीके से स्टाइपेंड लेने के लिए आवेदन भरा गया। जांच में फंसने के बाद कल्याण विभाग में पूछताछ के दौरान मोनी ने कबूला कि उसके 7-8 दोस्तों ने भी फर्जी सर्टिफिकेट पर स्टाइपेंड के लिए आवेदन भरा है।
धमका कर कॉलेज ने वसूली राशि
मोनी की सूचना पर जब डीडब्ल्यूओ नीरजा कुमारी ने कॉलेज के अमित डे से फोन पर पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि कॉलेज द्वारा 126 स्टूडेंट्स के नाम से स्टाइपेंड के लिए ऑनलाइन आवेदन भरा गया है। 26 स्टूडेंट्स को स्टाइपेंड मिल चुका है। इनमें से 13 स्टूडेंट्स से स्टाइपेंड के पैसे फीस के मद में ले लिए गए हैं। इन सभी का एडमिशन 2014-15 में करके कोर्स शुरू करेंगे। कॉलेज ने ई-कल्याण के नाम पर स्टाइपेंड प्राप्त करने वाले छात्रों को एसएमएस भेजकर धमकाते हुए राशि वसूली है।
ऐसे पकड़ में आया मामला
लोहरदगा की मुन्नी टोप्पो के एकाउंट में करीब 55 हजार रुपए डाले गए। इसके बाद उसके मोबाइल पर स्टाइपेंड को वापस करने से संबंधित धमकी भरे एसएमएस आने लगे। वह जिला कल्याण कार्यालय पहुंची। उसने पैसा वापस जमा करने की जानकारी मांगी। तब कर्मियों के कान खड़े हुए और मामला सामने आया। बताते चलें कि मुन्नी से बातचीत के दौरान ही मोनी का नाम सामने आया। इसके बाद घोटाले का पर्दाफाश हुआ।
कार्रवाई के लिए लिखा है सचिव को
मोनी कुमारी और कॉलेज के अमित डे से पूछताछ की गई है। राज्य के बाहर के निजी संस्थान यहां के छात्रों का प्रमाण पत्र प्राप्त कर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। इस मामले में उचित कार्रवाई के लिए सचिव को रिपोर्ट भेज दी गई है। नीरज कुमारी, जिला कल्याण पदाधिकारी।