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खुद की मुश्किल, बिटिया की राह बनाता आसान

8 वर्ष पहले
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रांची. साहस के सामने नि:शक्तता दम तोड़ देती है। मिसाल हैं, कुसई कॉलोनी के राजकुमार महतो। वह खुद चल-फिर नहीं सकते। इसके लिए ट्राईसाइकिल इस्तेमाल करते हैं। उनकी खुद की राह भले मुश्किल हो, लेकिन अपनी बिटिया को उसकी मंजिल तक पहुंचाना उनका रोज का काम है। सात साल की प्रतिमा बिशप स्कूल, डोरंडा में स्टैंडर्ड थ्री में पढ़ती है।
उनके घर से इसकी दूरी 2 किमी है। वह ट्राईसाइकिल से ही उसे स्कूल तक छोड़ते व लाते हैं। इस तरह बिजली विभाग में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी महतो का प्रतिदिन 4 किमी ट्राइसाइकिल चलाना सिर्फ वात्सल्य ही नहीं उनके साहस को बताता है।
उन्हें सात वर्ष की उम्र में पोलियो मार दिया था, तभी से विकलांग हैं। पिता के निधन के बाद उन्हें अनुकंपा पर बिजली बोर्ड में नौकरी मिली।
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