रांची. कश्मीर में शहीद हुए लेफ्टिनेंट कर्नल संकल्प कुमार की अस्थियां वाराणसी, हरिद्वार व इलाहाबाद में गंगा में प्रवाहित की जाएंगी। अस्थियां संकल्प के मामा दिनेश शुक्ला मंगलवार को लेकर रवाना होंगे।
श्राद्धकर्म के 13 दिनों तक चलने की परंपरा है। लेकिन शहीद संकल्प के परिजनों ने निर्णय लिया है कि उनका श्राद्धकर्म तीनों दिनों में खत्म कर दिया जाएगा। ताकि घर के लोगों को इस सदमे से उबरने में आसानी हो। सोमवार की सुबह से शाम तक सेना के कई जवान शहीद संकल्प के घर में जमे हुए थे।
शहीद के पिता ने पूजा-पाठ करने के बाद बताया कि संकल्प के मामा दिनेश दिल्ली में रहते हैं। वह मंगलवार को दो जगहों पर अस्थियां प्रवाहित करने के लिए जाएंगे। घर में पंडित गरुड़ पुराण का पाठ कर रहे हैं। सेना के जवान घर में भजन-कीर्तन कर रहे हैं। जवानों का खुद मन था कि वह ऐसा करें। शहीद के पिता इस बात को टाल नहीं पाए।
लॉज में रखा गया दोनों बच्चियों को
शहीद संकल्प की दोनों बेटियों को पिता की याद काफी सता रही है। घरवालों ने घर से दूर एक लॉज लिया और अन्य बच्चों के साथ दोनों बच्चियों को वहीं पहुंचा दिया, ताकि उनका ध्यान हट सके। शहीद के पिता का कहना है कि इंतजार रहता था कि बेटा फोन कर कहेगा कि वह छुट्टी में रांची आने वाला है। अब उसका फोन कभी नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि उनकी बहू प्रिया पटना में अपने पिता के साथ रहेगी। दोनों बच्चियां भी पटना में ही पढ़ाई करती हैं।
एनसीसी कैडेट्स कर रहे हैं काम-काज
एनसीसी के कई कैडेट शहीद संकल्प के घर में मौजूद हैं। घर का सारा काम वहीं कर रहे हैं। कैडेट बीके ठाकुर ने कहा कि कई कैडेट कश्मीर में जाकर जंग करना चाहते हैं। शहीद को खोने का दर्द सारे कैडेट को है। बीके ठाकुर बात करते करते रोने लगे।
बार-बार बदहवास हो रही हैं पत्नी
शहीद की पत्नी प्रिया घर में बैठे-बैठे जोर से चिल्लाने लगती हैं। दौड़ कर घर के बाहर आकर खड़ी हो जाती हैं। इसके बाद खुद ही चुपचाप बैठ जाती हैं। समझाने पर कहती हैं, उन्होंने संकल्प को खो दिया है। वह नहीं चाहते हुए भी बदहवास हो जा रही है। वहीं शहीद की मां को सोने की दवा दी जा रही है। ताकि स्थिति में सुधार हो।