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डाउनलोड करेंरांची. राज्य की शहरी आबादी को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाओं पर काम शुरू हुआ। लेकिन कोई भी योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। नगर विकास व पेयजल विभाग ने मिलकर ऐसी ही एक योजना पर कदम आगे बढ़ाया था। इसमें वर्ष 2042 तक रांची की अनुमानित आबादी को आधार मानकर जलापूर्ति की दीर्घकालीन योजना पर दो साल पहले काम शुरू हुआ था।
लोगों को 24 घंटे पानी मुहैया कराने की योजना थी। पर बात आगे नहीं बढ़ पाई। इस पर विभाग ने शुरुआती दौर में 35 लाख रुपए भी खर्च कर दिए। लेकिन नतीजा सिफर रहा।विभाग की मानें तो यह योजना रांची अरबन मिशन जलापूर्ति योजना में हो रही देरी व तकनीकी गड़बड़ी के कारण लटक गई।
यह थी योजना
योजना के तहत रांची की शहरी आबादी को पीपीपी मोड पर 24 घंटे पानी मुहैया कराना था। जलापूर्ति की जिम्मेवारी निजी हाथों में देने की बात थी। सप्लाई, ऑपरेशन से लेकर मेंटेनेंस व राजस्व वसूली तक का काम पीपी मोड पर करने की योजना थी। वर्ष 2042 तक रांची को कितने पानी की आवश्यकता होगी, इसके लिए कितने जलस्रोत, ट्रीटमेंट प्लांट व संसाधन की जरूरत होगी, इसका आकलन करने का काम निजी एजेंसी एकरा को सौंपा गया था। इसके लिए कंपनी को 35 लाख रुपए भुगतान भी किए गए। एजेंसी ने सरकार को सर्वे रिपोर्ट भी सौंप दी। वर्ष 2011-12 में सर्वे का काम तेजी से हुआ था। मगर बाद में लटक गया।
इसलिए नहीं बढ़ी बात
विभाग के अनुसार पुरानी जलापूर्ति योजना के साथ-साथ जेएनएनआरयूएम शहरी जलापूर्ति योजना को जोड़कर भविष्य के लिए सर्वे कराया गया था। लेकिन अरबन मिशन जलापूर्ति योजना के पूर्ण होने में हो रही देरी के कारण इस पर बात आगे नहीं बढ़ पाई। अब पुराने सेटअप (पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था) को ही हैंडओवर करने की बात चल रही है। फिलहाल अरबन मिशन जलापूर्ति को इससे अलग कर दिया गया है।
यह होता फायदा
अभी घरों तक पानी पहुंचाने का काम पीएचईडी करता है। जबकि घरेलू कनेक्शन देने व राजस्व वसूली का काम नगर निगम के जिम्मे है। रांची शहर में रूक्का, गोंदा व हटिया डैम से कम से कम आठ लाख लोगों के लिए जलापूर्ति की जाती है। लेकिन रांची नगर निगम में लीगल कनेक्शन महज हजारों में है। यानी बाकी कनेक्शन अवैध हैं। इसको लेकर नए डिप्टी मेयर ने कनेक्शन लेने व नियमित करने के लिए नियमों का सरलीकरण भी करवाया। निगम द्वारा वार्ड वाइज शिविर लगाकर कनेक्शन लीगल करने की बात कही गई थी। अब तक इस दिशा में काम नहीं हुआ है। अगर पीपीपी मोड व्यवस्था हैंडओवर होती तो पानी की बर्बादी भी रुकती। मीटर लग जाने से लोग जरूरत के अनुसार ही पानी इस्तेमाल करते ।
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