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सीएनटी का हो रहा है चीरहरण, आदिवासी अधिकारों को सुरक्षित रखे सरकार

7 वर्ष पहले
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रांची. झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष शशांक शेखर भोक्ता ने कहा है कि राज्य में सीएनटी एक्ट का चीरहरण हो रहा है और सरकारी महकमा आंख बंद किए हुए है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 14 साल बाद भी सीएनटी कानून का लगातार उल्लंघन जारी है। मंगलवार को सीएनटी से जुड़े एक मामले पर बैठक के बाद भोक्ता ने आरोप लगाया कि झारखंड में ना तो आदिवासी सुरक्षित हैं और ना ही उनके लिए बनेे कानून सुरक्षित हैं। उन्होंने सरकार से आदिवासियों के हित में बनाए गए कानून को सख्ती के साथ लागू करने की मांग की है।
ब्रांबे में भू-माफिया पर सख्ती का निर्देश
स्पीकर ने रांची के ब्रांबे की दसमी उरांव के बकास्त भूंइयरी जमीन मामले पर बैठक की। इस जमीन पर भू -माफिया लगातार कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। इसको लेकर राजस्व सचिव जेबी तुबिद और रांची जिले के अधिकारियों को विधानसभाध्यक्ष ने बैठक के लिए बुलाया था। भोक्ता ने अधिकारियों को सीएनटी के प्रावधानों के तहत इस मामले पर कार्रवाई करने का आदेश दिया। वहीं इस जमीन को लेकर दबंगों द्वारा धमकी दिए जाने को भी देखने का निर्देश दिया। स्पीकर ने कहा कि अगर भू-माफिया जमीन मालिक को धमकी देना बंद नहीं करेंगे तो उन्हें गिरफ्तार करने का आदेश जारी किया जाएगा।
कब से लागू है सीएनटी
1908 में ब्रिटिश सरकार ने छोटानागपुर टिनेंसी एक्ट बनाया था। 1947 में संशोधन करके अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग को भी इसके दायरे में लाया गया।