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डाउनलोड करेंसरायकेला/आदित्यपुर. 17 अगस्त 2011 को सरायकेला जेल से छह कैदियों को भगाने के लिए तत्कालीन प्रभारी जेलर रामाशंकर प्रसाद ने दो लाख रुपए घूस लिए थे। पैसे देने के बाद जेलर ने सभी कैदियों के हाथ पर जेल से रिलीज होने वाले स्टांप भी लगाए थे, ताकि बाहर तैनात कोई गार्ड उन पर संदेह नहीं कर सके।
जेलर को मिलाने का काम जेल में बंद नक्सली बलराम साहू ने किया था। यह जानकारी एसपी इंद्रजीत माहथा एवं सीआरपीएफ कमांडेंट रमेश कुमार ने बुधवार को सरायकेला में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी। उन्होंने बताया कि सोमवार को हेसाकोचा से पकड़े गए हार्डकोर नक्सली सोमरा हांसदा ने पूछताछ में कई और राज खोले हैं, जिन्हें अभी बताना उचित नहीं होगा। श्री माहथा ने कहा कि सोमरा के खुलासे के बाद प्रभारी जेलर रामाशंकर के खिलाफ चार्ज शीट दायर करने के लिए पुख्ता सबूत मिल गए हैं। शेष पेज १४ पर
30 मामले हैं दर्ज
सोमरा पर 30 मामले दर्ज हैं। इनमें 19 मामलों में सोमरा पर सीएलए एक्ट लगा हुआ है। चौका थाने में 16, चांडिल में 9, सरायकेला में 1, बुंडू में 1, कुचाई में 1, बाघमुंडी में 1 व नीमडीह थाने में 1 मामले सोमरा के खिलाफ दर्ज हैं।
क्या मिला सोमरा से
एक देसी पिस्तौल, चार जिंदा कारतूस, एक हैंड ग्रेनेड और चार डेटोनेटर।
क्षेत्र के विस्तार का मिला था काम
सोमरा को कुंदन पाहन दस्ते में क्षेत्र के विस्तार का काम मिला था। वह कई नामों से जाना जाता था। इनमें सोमरा हांसदा, सोमरा मांझी, पशुपति मांझी तथा मारगा मुख्य हैं। वह गांव-गांव में घूमकर भाकपा माओवादी की किसान क्रांतिकारी कमेटी का गठन करने लगा था।
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