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राहुल-शिंदे के दौरे के बाद झारखंड पर होगा फैसला

8 वर्ष पहले
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रांची/नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे के बाद ही तय होगा कि झारखंड में सरकार बनाई जाए या विधानसभा भंग कर नए सिरे से चुनाव हों। शिंदे का झारखंड दौरा 14 मई को और राहुल गांधी का दौरा 19 मई को प्रस्तावित है। यहां राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने, नई सरकार बनाने या विधानसभा भंग कर चुनाव कराने के मुद्दे पर कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व ऊहापोह में है। शिंदे और राहुल झारखंड की स्थिति की समीक्षा करेंगे। इसके बाद ही आलाकमान कोई निर्णय लेगा।
सूत्रों के मुताबिक झारखंड पर विशेष नजर रखने वाले केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश इस पक्ष में हैं कि फिलहाल राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ा कर नवंबर में दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ ही झारखंड में भी चुनाव कराए जाएं। केंद्र के कई अन्य नेता भी इसी बात से इत्तफाक रखते हैं।
यहां 18 जुलाई को राष्ट्रपति शासन के छह माह की अवधि समाप्त हो रही है। कर्नाटक में मिली सफलता से उत्साहित केंद्रीय कांग्रेस का एक वर्ग चाहता है कि राष्ट्रपति शासन की अवधि किसी हाल में नहीं बढ़ाई जाए। ऐसा करने से कांग्रेस फायदे में रहेगी। राष्ट्रपति शासन को एक्सटेंशन देने से जनता के बीच गलत मैसेज जाएगा। इसका खामियाजा पार्टी को चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। इस सोच के लोग जुलाई में चुनाव कराने के लिए केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव बना रहे हैं।
राजेंद्र ने सोनिया से की मुलाकात
कांग्रेस विधायक दल के नेता राजेंद्र सिंह ने शुक्रवार को पार्टी सुप्रीमो सोनिया गांधी से मुलाकात कर उन्हें झारखंड की स्थिति से अवगत कराया। इससे पहले सिंह ने पार्टी के वरीय नेता आस्कर फर्नाडीस व प्रदेश प्रभारी शकील अहमद से भी बातचीत की।
सोनिया गांधी से हुई लगभग बीस मिनट की बातचीत में सिंह ने प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों तथा विधायकों की भावना से उन्हें अवगत कराया और राष्ट्रपति शासन में हो रहे कार्यो का ब्योरा दिया। शाम में सिंह के आवास पर कांग्रेस विधायकों की बैठक हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। जानकारी के अनुसार पार्टी हाईकमान ने एक बार फिर राज्य में सरकार गठन की संभावना तलाशने के संकेत नेताओं को दिए हैं।
एक सप्ताह से दिल्ली में टिके हैं कांग्रेसी
कांग्रेस के कई विधायक, सांसद पिछले एक सप्ताह से दिल्ली में ही टिके हैं। नेताओं का प्रयास है कि राज्य में लोकतांत्रिक सरकार बने। इसके लिए कांग्रेस के नेता झामुमो के संपर्क में भी हैं। लेकिन पार्टी हाईकमान प्रदेश में सरकार गठन में रुचि नहीं दिखा रहा। पिछले दिनों गृह मंत्रालय से विधानसभा भंग करने संबंधित नोट बनाए जाने की सूचना के बाद प्रदेश के नेता और अधिक रेस हो गए हैं। वे दिल्ली में ही डेरा डाले बैठे हैं। शुक्रवार की शाम गीताश्री उरांव, सौरव नारायण सिंह तथा योगेंद्र साव ने भी राजेंद्र सिंह के साथ लंबी बैठक की। केएन त्रिपाठी और अनंत प्रताप देव भी दिल्ली में हैं।
पार्टी हाईकमान को बताई स्थिति
पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष को राज्य की स्थिति से अवगत कराया हूं। सोनिया गांधी ने पूरी गंभीरता के साथ प्रदेश की स्थिति को समझा है। आस्कर साहब और शकील साहब से भी बातचीत हुई है। सोलह मई को पुन: मैडम ने हमलोगों को बुलाया है।’’
राजेंद्र सिंह, कांग्रेस विधायक दल के नेता
विकास कार्य पर होगी नजर
केंद्रीय गृह मंत्री छह घंटे के रांची प्रवास के दौरान अफसरों से यह जानने का प्रयास करेंगे कि राष्ट्रपति शासन का कितना लाभ यहां के लोगों को मिला। विकास कार्य में गति आई या नहीं। राज्य की विधि व्यवस्था की स्थिति कैसी है।