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डाउनलोड करेंरांची. रेलवे स्टेशनों पर मिनरल वाटर रेल नीर धीरे-धीरे गायब हो रहा है और उसकी जगह निजी कंपनियों के प्रोडक्ट ले रहे हैं। निजी कंपनियों के उत्पादों पर ज्यादा फायदा और रेल नीर की कम सप्लाई इसका कारण बन रही है। स्थिति यह है कि मांग करने के बावजूद निजी या लोकल कंपनियों की बोतलें खरीदना यात्रियों की मजबूरी है।
रांची रेलवे स्टेशन परिसर में एक-दो दुकानें ही हैं, जहां रेल नीर मिलता है, बाकी जगहों पर निजी कंपनियों के उत्पाद ही उपलब्ध हैं। रेलवे के अधिकारी यह तो मानते हैं कि इससे रेलवे के राजस्व को नुकसान हो रहा है।लेकिन, इसे रोकने का कोई प्रयास नहीं दिखाई देता।अगर रेल नीर की बिक्री बढ़े, तो ब्रांडिंग के साथ रेलवे की आय भी बढ़ेगी।
वितरक करते हैं मनमानी
दुकानदारों का कहना है कि इस मामले में वितरकों की मनमानी चलती है। वे जिस उत्पाद को चाहते हैं, वही सप्लाई करते हैं। रेल नीर की सप्लाई कम है। दुकानदारों को भी इसमें ज्यादा फायदा होता है। निजी कंपनियों की 12 बोतलों की कीमत 115 रुपए पड़ती है, यानी प्रति बोतल करीब 9.58 रुपए। यात्रियों को यह 15 रुपए में बेची जाती है। जबकि, रेल नीर की एक बोतल करीब 10.83 रुपए की। निजी कंपनी की हर बोतल पर सवा रुपए का अधिक फायदा होता है।
रेलवे करेगा कार्रवाई
यात्री अगर मांग करते हैं, तो उन्हें रेल नीर ही दुकानदार को उपलब्ध कराना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो रहा है, तो रेलवे कार्रवाई करेगा। हालांकि, रेल नीर का उत्पादन मांग से कम है, इस कारण भी निजी कंपनियां फायदे में रहती हैं। बीएन मंडल, सीनियर डीटीएम, रेलवे रांची
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