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माओवादियों और आदिवासियों में भेद समझें जवान : राजनाथ

7 वर्ष पहले
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रांची. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सीआरपीएफ जवान माओवादियों और आदिवासियों में भेद समझें। स्थानीय लोगों से बेहतर रिश्ता बनाएं। उन्होंने कहा कि सारंडा के थोलकोबाद सीआरपीएफ कैंप का दौरा कर जाना कि विपरीत परिस्थितियों में भी वहां जवान कैसे बेहतर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सारंडा की स्थिति में काफी बदलाव आया है। माओवादियों ने समझा था कि सारंडा उनका हो गया, लेकिन यह उनकी गलतफहमी थी। राजनाथ सिंह मंगलवार को राजभवन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ें, केंद्र सरकार उनसे वार्ता को तैयार है। सरकार हिंसा का मार्ग नहीं अपनाएगी, लेकिन किसी को हिंसा करने की अनुमति भी नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन के लिए हिंसा की कोई जगह नहीं है। यहां वोट से ही सत्ता बनाई और बदली जा सकती है। इसलिए बेहतर होगा कि भारत को महान भारत बनाने में माओवादी अपना योगदान दें।
झारखंड को हरसंभव सहयोग
गृहमंत्री ने कहा कि केंद्र झारखंड को हरसंभव सहयोग देने को तैयार है। यहां पर्याप्त केंद्रीय बलों की प्रतिनियुक्ति की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कुछ कठिनाइयां बताई हैं। उसे दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि माओवाद की समस्या से प्रभावित राज्य सरकारें क्या कर रही हैं, वे जानना चाहते हैं। इसलिए झारखंड से यात्रा शुरू की है।
कश्मीर की तर्ज पर जवानों को विशेष भत्ता
गृहमंत्री सेना के हेलिकॉप्टर से सारंडा के थोलकोबाद पहुंचे। यहां से खुद मोटरसाइकिल चलाते हुए 800 मीटर दूर स्थित सीआरपीएफ कैंप गए। उन्होंने नक्सली मुठभेड़ में शहीद हुए जवानों की तुलना भगत सिंह व चंद्रशेखर आजाद की वीरता से की। राजनाथ सिंह ने कहा कि सारंडा समेत उग्रवाद प्रभावित इलाके में तैनात सीआरपीएफ जवानों को जम्मू-कश्मीर में तैनात सैनिकों की तर्ज पर विशेष भत्ता दिया जाएगा।