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राज्यसभा चुनाव, बाहरियों के सिर फिर सजेगा ताज

7 वर्ष पहले
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रांची. झारखंड में दो सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में इस बार फिर बाहरियों के सिर ताज सजेगा। दोनों प्रत्याशी परिमल नथवाणी व प्रेमंचद गुप्ता स्थानीय नहीं हैं। वहीं इस चुनाव में छोटे दलों की ही चली। परिमल आजसू के उम्मीदवार बनना चाहते थे। आजसू भी इसके लिए अंतिम समय तक अड़ा रहा। आजसू नेता चाहते थे कि भाजपा उसे समर्थन करे। जबकि आजसू के छह और भाजपा के 18 विधायक हैं। भाजपा के गले यह बात उतरी नहीं। अंतत: नथवाणी को निर्दलीय प्रत्याशी बनवा कर वह अपनी प्रतिष्ठा बचा पाने में सफल हुई। वहीं झामुमो द्वारा सविता को उम्मीदवार नहीं बनाने से भी भाजपा को राहत मिल गई। नहीं तो उसे फजीहत झेलनी पड़ सकती थी।

इधर, पांच विधायकों के बल पर राजद अपने प्रत्याशी प्रेमचंद गुप्ता को कांग्रेस का समर्थन दिलाने में सफल रहा। हालांकि झामुमो ने पूर्व डिप्टी सीएम सुधीर महतो की विधवा सविता महतो को प्रत्याशी बनाने की घोषणा की थी, लेकिन उसे कांग्रेस का समर्थन नहीं मिल सका। अंतत: उनका पत्ता कट गया। इससे नाराज पार्टी के कुछ विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है।

ऐसे किया परिमल नथवाणी ने नामांकन

नथवाणी लगभग 10 बजे प्रदेश भाजपा मुख्यालय पहुंचे। लगभग 11.30 बजे नथवाणी भाजपा विधायकों के साथ भाजपा मुख्यालय से विधानसभा रवाना हुए। वहां लगभग 11.40 बजे पहुंचे। भाजपा व आजसू विधायकों के साथ नथवाणी ने नामांकन दाखिल किया। फिर वहां से वे भाजपा मुख्यालय पहुंचे। एक घंटे तक पार्टी के बड़े नेताओं के साथ बात करने के बाद चले गए।

विशेष राज्य बनाने की होगी कोशिश

नामांकन दाखिल करने के बाद परिमल नथवाणी ने कहा कि छह साल में उन्होंने राज्य के लिए जो काम किया, उसे यहां की जनता और विधायक सभी जानते हैं। उन्होंने यहां झारखंडी बन कर काम किया। इसीलिए आजसू और भाजपा का उन्हें समर्थन मिला। अब वह युवा झारखंड को विशेष बनाने का प्रयास करेंगे।

नथवाणी के हैं दस प्रस्तावक

भाजपा की ओर से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रहे विधायक सीपी सिंह, रामचंद्र बैठा, हरेकृष्ण सिंह, अमित कुमार यादव, लक्ष्मण गिलुआ एवं सत्यानंद झा तथा आजसू की ओर से चंद्र प्रकाश चौधरी, उमाकांत रजक, नवीन जायसवाल, रामचंद्र सहीस नथवाणी के प्रस्तावक बने हैं।