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डाउनलोड करेंरांची. राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों को लेकर सत्ताधारी गठबंधन यूपीए में फूट पड़ गई है। अपने उम्मीदवार प्रेमचंद गुप्ता को कांग्रेस और झामुमो से समर्थन न मिलने से नाराज राजद ने सरकार से समर्थन वापसी की धमकी दी है। विधायक संजय यादव ने कहा है कि मंगलवार को विधायकों की बैठक के बाद सभी राजभवन जाएंगे। विधायक दल की नेता अन्नपूर्णा देवी का कहना है कि पार्टी जनहित में कोई भी कड़ा फैसला ले सकती है। सरकार में शामिल झामुमो ने पार्टी के दिवंगत नेता सुधीर महतो की पत्नी सविता महतो और कांग्रेस ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष आलमगीर आलम को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
संजय यादव ने बताया कि मंगलवार सुबह 11 बजे पार्टी विधायक दल की बैठक होगी। तीन बजे सभी विधायक समर्थन वापसी का पत्र सौंपने राजभवन जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास नहीं कर रही। लोग परिवारवाद कर रहे हैं। इसलिए, अब इस सरकार में रहना उचित नहीं है।
कांग्रेस ने आलमगीर और झामुमो ने सविता को बनाया उम्मीदवार
मुख्यमंत्री देखेंगे धमकी को
राजद के समर्थन वापसी की धमकी का मुझे नहीं पता। वैसे यह मामला मुख्यमंत्री का है। वह निश्चित रूप से इस मामले को देख रहे होंगे। सुखदेव भगत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
यूपीए के दोनों प्रत्याशी जीतेंगे
राजद ने क्या धमकी दी है, पार्टी को नहीं पता। पार्टी आश्वस्त है कि सत्ता पक्ष के विधायक यूपीए फोल्डर के दोनों प्रत्याशी को जिता सकते हैं। सुप्रियो भट्टाचार्या, केंद्रीय प्रवक्ता, झामुमो
अब झामुमो व कांग्रेस को होगी निर्दलीयों की जरूरत
जेवीएम के 11 विधायकों ने बहिष्कार किया तो कुल 70 विधायक वोट करेंगे। फरार विधायक सीता सोरेन के वोट न करने और झाविमो के निजामुद्दीन अंसारी के वोट डालने के बाद भी गिनती 70 ही रहेगी। इस स्थिति में पहले प्रत्याशी को जीत के लिए 24 वोट जरू री होंगे।
झामुमो : पार्टी के 18 विधायकों के अलावा छह और प्रत्याशियों की जरूरत होगी। इसके लिए उसे छह निर्दलीय या फिर राजद के पांच व एक निर्दलीय का समर्थन जरूरी होगा।
राजद : अपने पांच विधायकों के अलावा कांग्रेस, झामुमो और निर्दलीय की भी जरूरत। झामुमो के 18 विधायकों का समर्थन प्राप्त हुआ तो एक निर्दलीय की जरूरत। अगर कांग्रेस के 13 विधायक राजद से जुड़ गए तो उसे छह निर्दलीयों का जुगाड़ करना पड़ेगा।
एक गणित यह भी : अगर झाविमो भी अंतिम समय में वोट में शामिल हो गए तो पहले प्रत्याशी को जीत के लिए 28 विधायकों की जरूरत होगी जाएगी। उस स्थिति में पूरा समीकरण गड़बड़ा जाएगा। फिर द्वितीय वरीयता के मत ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएंगे।
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